Author: Rajesh Ranjan Nirala

क्या आप वेदना में कह रहे हैं, ओह, मैं सिर दर्द से परेशान हूं या मुझे यह भयंकर बीमारी है आदि? परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं को खुद के लिए दावा करें। नीतिवचन 4:22 में बाइबल कहती है, क्योंकि जिनको वे प्राप्त होती हैं, वे उनके जीवित रहने का, और उनके सारे शरीर के चंगे रहने का कारण होती हैं। इसलिए परमेश्वर का वचन आपको चंगा करता है। जो परम प्रधान के छाये हुए स्थान में बैठा रहे वह सर्वशक्तिमान की छाया में ठिकाना पाएगा, वह तुझे अपने पंखों की आड में ले लेगा, और तू उसके परों के नीचे शरण पाएगा,…

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आत्मिक ज़िन्दगी में आगे बढ़ने के लिए,अपनी पिछली जिंदगी से रिश्ता तोड़ना निहायत ज़रूरी है| ख़ुदा ज़िन्दगी को नया बना सकता है, मगर पुरानी ज़िन्दगी से रिश्ता तोड़ना, आपके हांथ में है| नई ज़िंदगी में आगे बढ़ने के लिए, जीवन की बेकार बातों का टूटना निहायत ज़रूरी है| उत्पत्ति 19:17 में ख़ुदा के फ़रिश्ते ने सख़्त हिदायत दी, पीछे पलटकर मत देखना| सामने एक नई ज़िंदगी थी, और पीछे थी मौत| लूत की पत्नी सदोम से बाहर ज़रूर निकल आई थी, मगर सदोम अभी भी उसके दिमाग़ पर छाया हुआ था| आख़िर वो कौन सा आकर्षण था, जो लूत की…

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यदि तुम में कोई दुखी हो तो वह प्रार्थना करे। यदि आनन्दित हैं तो स्तुति के भजन गाए। वचन कहता हैं कि जब हमारे लिए दुख का समय हैं। जब हम गरीबी में जीवन बिता रहे हो, जब हम क्लेश सह रहे हो, जब हमे नही पता कि क्या करना है,जब हमे मार्ग दर्शन की आवयश्कता हो, उस समय हम प्रभु से प्रार्थना करे। उसके वचन को पढ़े और प्रार्थना करे कि परमेश्वर आपसे बात करे आपको वो वचन दे जिसकी आपको जरूरत हो परमेश्वर आपको जो भी वचन दे उसके अनुसार करे उसकी बात को सुने। क्योकि 1पतरस 5-7…

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सत्य की नीव डगमगाती जरूर हैपर डूबती नहीजीवन मे समस्या हर दिन खडी हैजीत जाते हैं वो जिनकी सोच बडी हैइन्सान वही महान है जो बुरीस्थिती मे फिसले नही और अच्छी स्थिती मे उछले नहीप्राथर्ना और विश्वास दोनो अदृश्य है, परन्तु दोनो मे इतनीताकत है कि नामुकिन को मुमकिन बना देता हैआमीन आमीन आमीनरैव्ह. राजेश गिरधर……..

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सत्य है प्रार्थना में ही , समस्याओं का समाधान है| कुछ प्रार्थनाएं साधारण होती हैं| क्योंकि प्रार्थना करने वाला , साधारण होता है| कुछ प्रार्थनाएं , महज़ रीति रिवाज़ होती हैं| ऐसी प्रार्थनाएं , प्रभावहीन होती हैं| पौलूस कहता है मैं आत्मा से भी प्रार्थना करूंगा| प्रार्थना करने वाले और प्रार्थना योद्धा में अंतर होता है| पौलूस कहता है –पवित्रात्मा हमारी आत्मा के साथ आहें भर भर कर प्रार्थना करता है| मन में जब नकारात्मक बातें हों , प्रार्थना अपना असर खो देती है| शंका और अविश्वास , घुन की तरह आपकी प्रार्थना को खोखला कर देते हैं| 1राजा 18:42 में लिखा…

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पत्थर में खुदा है,पर पत्थर खुदा नहीं हैखुदा दिल में ही है कोई गुमशुदा नहीं हैगौर कर इन विरानों में ढूंढने वाले ऐ शख्सतू ही जुदा है खुदा से पर खुदा जुदा नहीं है तुझसेआमीनरैव्ह राजेश गिरधर

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जब हम प्रार्थना करते हैं,उसका उत्तर नहीं मिलता ; या उत्तर हमारे सोच के अनुसार नहीं होता| प्रार्थनाओं के उत्तर में देरी हो जाती है तो यह हमे समस्या की तरह लगने लगती है| वचन कहता है ख़ुदा के वायदे और प्रतिज्ञाएं अटल हैं| प्रतिज्ञाएं पूरी होंगी, मगर उसकी कुछ शर्तें भी हैं| ख़ुदा की ओर देखने से पहले, हमें अपनी ओर देखना भी ज़रूरी है| ये तो निश्चित है, कि ग़लती परमेश्वर की ओर से नहीं हो सकती है| ज़िन्दगी में हमारी कमियां ही, दुआओं में बाधा बनती हैं|* कई बार हमें विश्वास होता है, और नहीं भी होता…

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कहते हैं गिरगिटट की तरह रगं मत बदलना,पर आज हर पल इन्सान हर जगह,चाहे रिश्ते हो,चाहे करोबार हो,या जमीन जायदाद हो , गिरगिट से भी ज्यादा और जल्दी रंग बदलता हुआ नजर आता है,लोग मिलते हैं बदलते हुए मौसम की तरहा| इंसान और गिरगिट में कोई फ़र्क तो होना ही चाहिए| जो हालात के साथ बदल जाए , वो रिश्ता कैसा?और वो इन्सान क्या। दावे और वायदे करने वाले चेले भी , गतसमनि बाग में यीशू को तनहा छोड़ कर भाग गए| हमारे बुज़ुर्ग , मरते दम तक रिश्ता निभाने के लिए जाने जाते थे| यूं तो दुनियां में डर…

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ऐ हमारे पिता , तू जो आसमां पर है| तेरा नाम पाक (पवित्र) माना जाए। येशू मसीह ने पर्मेश्वर को , प्रार्थना में सबसे पहले , पिता के रूप में पेश किया है| हमें इस रिश्ते को गहराई से समझने की ज़रूरत है*| रोमियों 8:15 में पौलूस कहता है— हम ख़ुदा को हे अब्बा , हे पिता कहकर पुकारते हैं| मलाकी 1:6 में लिखा है — पुत्र पिता का , और दास स्वामी का आदर करता है ; यदि मैं पिता हूं तो मेरा अदार मानना कहां है? बच्चे , सांसारिक माँ बाप के ज़रिये , आसमानी पिता तक पहुंचाते हैं|…

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आज अधिकतर विश्वासियों के जीवन को पाप के कीड़े ने खा कर बरबाद कर दिया है। हमारे द्वारा लिए गए गलत निर्णयों की वजह से हम पाप करते है जो हमे अन्दर से खोखला कर देते हैं और हमारे लिए यही पाप कष्टदायक बन जाते हैं। हम चाहे ऊपर या बाहर से ठीक दिखाई दें लेकिन पाप हमें अन्दर ही अन्दर काटता रहता है। हम सब पाप के इन दुष्परिणामों को अपने व्यक्तिगत अनुभवों से जानते हैं।बाइबल के अनुसार, पाप परमेश्वर के मार्गों में चलने की अपेक्षा अपने स्वयं के मार्गों पर चलने का एक व्यवहार है। जब हम अपनी…

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