ऐ हमारे पिता , तू जो आसमां पर है| तेरा नाम पाक (पवित्र) माना जाए। 

येशू मसीह ने पर्मेश्वर को , प्रार्थना में सबसे पहले , पिता के रूप में पेश किया है| हमें इस रिश्ते को गहराई से समझने की ज़रूरत है*| रोमियों 8:15 में पौलूस कहता है— हम ख़ुदा को हे अब्बा , हे पिता कहकर पुकारते हैं| मलाकी 1:6 में लिखा है — पुत्र पिता का , और दास स्वामी का आदर करता है ; यदि मैं पिता हूं तो मेरा अदार मानना कहां है? बच्चे , सांसारिक माँ बाप के ज़रिये , आसमानी पिता तक पहुंचाते हैं| जो बच्चे अपने माँ बाप की इज्ज़त नहीं करते , वो स्वर्गीय पिता की इज्ज़त कैसे कर सकते हैं?* जो अपने जन्माने वालों की सेवा नहीं कर सकते , वो ख़ुदा के सेवा कैसे करेंगे? नीतिवचन 23:22 में लिखा है — अपने जन्माने वाले की सुनना , जब तेरी माँ बुज़ुर्ग हो जाए , तब भी उसे तुच्छ ना जानना| कलीसिया को माँ का दर्ज़ा दिया जाता है , जो जन्म देने वाली माँ का नहीं हुआ , वो कलीसिया का क्या होगा? *जो माँ बाप के प्रति ईमानदार है , वो ही अपने आसमानी पिता के प्रति ईमानदार हो सकता है| पर्मेश्वर का स्तर तो बहुत ऊंचा है , उसके योग्य सम्मान होना बहुत जरूरी है
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर
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