Author: Rajesh Ranjan Nirala

आज हम सबको विश्वास में मजबूत होना है। क्योंकि जिस व्यक्ति के पास विश्वास की चाबी होती है। उस चाबी से हर एक दरवाजा हर एक द्वार खुल जाता है  चाहे कितना भी बड़ा ताला क्यों ना हो। विश्वास दिखना चाहिए, हमारी बातों में, हमारे चाल चलन में। और हमारे हर एक काम में, जो हम पृथ्वी पर करते हैं। हमको निडर बनना होगा। और परिस्थिति का सामना करना होगा। क्या आप परमेश्वर के काम को करना चाहते हैं। क्या परमेश्वर की महिमा का कारण बनना चाहते हैं। *अगर खुदा का काम करना है. तो आपको सामना करना पड़ेगा, हर…

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हमारे प्रतिदिन के बल के लिये जो वचन परमेश्वर देता है उसका यह वचन ही हमारा आत्मिक भोजन है। परमेश्वर अपना जीवित वचन रोज व रोज देता है। संगति द्वारा भोजन और भी स्वादिष्ट बन जाता है। साथ मिलकर भोजन लेने से हमारी संगति भी आनन्ददायक बन जाती है। जब हम अकेले भोजन करते हैं तब इतना आनन्द प्राप्त नहीं होता। सर्वप्रथम प्रभु यीशु के साथ और उसके बाद एक दूसरे साथ संगति के लिये इकठ्ठा होना चाहिये। हमें भी प्रभु यीशु के लिये ऐसा ही प्रेम होना चाहिये और जैसे मित्र मित्र के साथ वैसे ही उसके साथ भी…

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पुराने समय मे और यहाँ तक कि आज के समय मे भी गधे की चर्चा होती है।कठिन श्रम और बहुत ज्यादा मेहनत।आपने धोबी के गधे के बारे में सुना होगा,वह किनती मेहनत करता है!! गदहों का उपयोग शुरू से ही बोझा ढोने में किया जाता है।वह रात दिन मेहनत करता है,ईंटे ढोता है,मनुष्य की सवारी के काम आता है।गधा कठिन परिश्रम के शाप का शिकार है।गधा आम साहित्य और बोल चाल में उपहास और हँसी का भी पात्र है।अगर किसी को नीचा दिखाना हो, मंद बुद्धि का और मूर्ख बताना हो तो उसे गधा कहा जाता है।💥 परमेशवर के वचन…

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जब हम अपने दुखों में फसे हुए यीशु मसीह के पास आते हैं वो हमारे दुखों से हमें छुटकारा भी दिला देता है हमारा जीवन भी सही रास्ते पर आने लगता है ।मगर उसी के साथ साथ हमारे आसपास एक काम और हो रहा होता है जिसकी ओर हमारा ध्यान बहुत देर से जाता है वो काम है हमारे अपने जिन्हें हम कहते हैं वो हमसे दूर होना शुरू हो जाते है ।हमारे दोस्त हमसे किनारा करने लगते है वजह हम बाइबिल के हिसाब से जीवन जीना शुरू करते और वो सब सांसारिक तरीक़े पर ही चलते होते हैं इस…

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समस्याओं और परेशानियों में ही, सब्र (धीरज ) (धैर्य )पैदा होता है| आप कितने धैर्यवान हैं, यह समस्याओं के दौरान ही पता चलता| जब समस्याओं के तूफ़ानों से आप घिर जाते हैं तब ही आपको पता चलेगा,कि आपमे सब्र करने और सहने की ताक़त है की नहीं| याकूब 1:3 में लिखा है —इसको पूरे आनंद की बात समझो, यह जान कर कि, तुम्हारे ईमान के परखे जाने से, धीरज पैदा होता है| ख़ुदा के वायदों पर ईमान रखना है, मगर वायदों के पूरा होने तक, सब्र रखना उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है| परेशानियों के तूफानों में, सब्र आपके ईमान का…

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विपत्ति के समय ज्यादातर लोग साहस छोड देते हैं और घबरा कर भर में आ जाते हैं और उस भर को छुपाने की कोशिश करते हैंजिसके बारे में हम सिर्फ खुद ही सोचते और बहुत बार घबरा कर साहस छोड देते हैं ।ऐसा बहुत बार उन लोगों के साथ हो जाता है जो अपने को अकेला समझते हैं जिन्हें लगता है उनका कोई नहीं वो लोग भय के समय कुछ भी उलटी सीधी हरकत करने से भी नही डरते ।जबकि बाइबिल में परमेश्वर कहता है मत डर बस विश्वास कर एक बार नही बहुत बार परमेश्वर ने कहा मत डर…

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*एक घर के पास काफी दिन से एक बड़ी इमारत का काम चल रहा था। वहां रोज मजदूरों के छोटे-छोटे बच्चे एक दूसरे की शर्ट पकडकर रेल-रेल का खेल खेलते थे।* *रोज कोई बच्चा इंजिन बनता और बाकी बच्चे डिब्बे बनते थे…**इंजिन और डिब्बे वाले बच्चे रोज बदल जाते,पर…**केवल चङ्ङी पहना एक छोटा बच्चा हाथ में रखा कपड़ा घुमाते हुए रोज गार्ड बनता था।**वहां का ठेकेदार बच्चों का यह खेल रोज देखता था* …*उन बच्चों को खेलते हुए रोज़ देखने वाले ठेकेदार ने कौतुहल से गार्ड बनने वाले बच्चे को पास बुलाकर पूछा….**”बच्चे, तुम रोज़ गार्ड बनते हो। तुम्हें कभी इंजन,…

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BIBLE इन्सान को कदम कदम पर सहारा देती है हर अच्छी तथा बुरी बात के बारे मे जानकारी देती है।कुछ भी छुपाती नही; BIBLE मे अच्छी बातों के साथ साथ बहुत सी कडवी बातें भी लिखी हुई है।जो हर कोई पचा नही पाता और BIBLE का विरोध करने लगता है क्योंकि सच्चाई हमेशा कडवी ही होती है मगर जो भी इन कडवी बातों को सह जाता वो अपने जीवन को साफ सुथरा करने मे कामयाब हो जाता है।उसे फिर किसी के पास जाकर पूछने की आवश्यकता नहीं होती।कैसे जीना और किन बातों का इन्कार करना है । BIBLE का अध्याय…

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यीशु ने फिर लोगों से कहा, “जगत की ज्योति मैं हूँ ; जो मेरे पीछे हो लेगा वह अन्धकार में न चलेगा , परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा ।आज हमारा जीवन जो यीशु मसीह को ग्रहण करने के बाद जो बदला है वो हमारी खुशनसीबी है कि उसने हमे उस अन्धकार से निकाला जिसमें हम चला करते थे ।उस दलदल से बाहर निकाला जो हमें पाप के अन्दर और धसाने का काम कर रहा था ; हमें वो आजादी मिली जिसके हम हकदार थे जो आजादी आदम के पाप के कारण खत्म हो गई थी । शैतानी जिन्दगी से आजादी…

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प्रभु के प्रति हमारा विश्वास एक पुल(Bridge)के समान है, जो आपको और प्रभु को आपस में जोड़े रखता है| विश्वास है तो सबकुछ है, विश्वास नहीं तो कुछ भी नहीं है| विश्वास की सबकी, अपनी परिभाषा हो सकती है| विश्वास का रिश्ता, चंगाई और दुआओं के सुने जाने से नहीं, प्रभु से है ; वो सुने या ना सुने तब भी वो मेरा प्रभु है अगर दुआ ना सुनी जाए, तो इसका मतलब यह नहीं है, कि आप गुनहगार हैं, या आपका विश्वास कमज़ोर है| प्रभु की मर्ज़ी को समझने की ज़रूरत है| अपने आपको प्रभु की मर्जी पर छोड़…

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