कहते हैं गिरगिटट की तरह रगं मत बदलना,पर आज हर पल इन्सान हर जगह,चाहे रिश्ते हो,चाहे करोबार हो,या जमीन जायदाद हो , गिरगिट से भी ज्यादा और जल्दी रंग बदलता हुआ नजर आता है,लोग मिलते हैं बदलते हुए मौसम की तरहा| इंसान और गिरगिट में कोई फ़र्क तो होना ही चाहिए| जो हालात के साथ बदल जाए , वो रिश्ता कैसा?और वो इन्सान क्या। दावे और वायदे करने वाले चेले भी , गतसमनि बाग में यीशू को तनहा छोड़ कर भाग गए| हमारे बुज़ुर्ग , मरते दम तक रिश्ता निभाने के लिए जाने जाते थे| यूं तो दुनियां में डर बहुत से हैं , मगर रिश्तों के टूटने से बड़ा डर कोई और नहीं है| जो विश्वासयोग्य हैं भी ,तो लोग उन्हें बेवकूफ़ समझते हैं| रिश्तों को लेकर , आज इंसान इतना डरा हुआ क्यों है? क्यों विश्वास का शीशा , टूट कर चकनाचूर हो रहा है| क्यों आज बच्चों को ये सिखाना ज़रूरी हो गया है की , हर किसी पर विश्वास मत करना? लड़कियों को लेकर माँ बाप , इतने डरे हुए क्यों हैं? बिगड़े हुए ऐसे हालात में भी , सिर्फ़ एक दोस्त ऐसा है , जिसपर आप , आंख मूंद कर विशवास कर सकते हैं| वो कोई और नहीं , येशू है| सब बदल जाएं , मगर वो नहीं बदलेगा| सब छोड़ दें , मगर वो नहीं छोड़ेगा|
आमीन
प्रभु आपको परख का आत्मा दे
रैव्ह राजेश गिरधर

