आत्मिक ज़िन्दगी में आगे बढ़ने के लिए,अपनी पिछली जिंदगी से रिश्ता तोड़ना निहायत ज़रूरी है| ख़ुदा ज़िन्दगी को नया बना सकता है, मगर पुरानी ज़िन्दगी से रिश्ता तोड़ना, आपके हांथ में है| नई ज़िंदगी में आगे बढ़ने के लिए, जीवन की बेकार बातों का टूटना निहायत ज़रूरी है| उत्पत्ति 19:17 में ख़ुदा के फ़रिश्ते ने सख़्त हिदायत दी, पीछे पलटकर मत देखना| सामने एक नई ज़िंदगी थी, और पीछे थी मौत| लूत की पत्नी सदोम से बाहर ज़रूर निकल आई थी, मगर सदोम अभी भी उसके दिमाग़ पर छाया हुआ था| आख़िर वो कौन सा आकर्षण था, जो लूत की पत्नी को पीछे की ओर खींच रहा था| सदोम से निकलने के बाद भी वो, सदोम से रिश्ता नहीं तोड़ पाई थी| गुज़री हुई ज़िन्दगी की, समस्याएं ; दुःख ; परेशानियां ; गलतियां ; कड़वाहट, आपके दिमाग़ के किसी कोने में, आज भी महफूज़ तो नहीं हैं? एक धागा, नाज़ुक सा ही सही, आपको बार-बार पीछे खींचता रहता है| यहाँ तक की आपकी दुआओं में भी विघ्न पैदा करता है| आगे बढ़ना है, तो इस धागे को तोड़ना ही पड़ेगा|
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर

