यदि तुम में कोई दुखी हो तो वह प्रार्थना करे। यदि आनन्दित हैं तो स्तुति के भजन गाए। वचन कहता हैं कि जब हमारे लिए दुख का समय हैं। जब हम गरीबी में जीवन बिता रहे हो, जब हम क्लेश सह रहे हो, जब हमे नही पता कि क्या करना है,जब हमे मार्ग दर्शन की आवयश्कता हो, उस समय हम प्रभु से प्रार्थना करे। उसके वचन को पढ़े और प्रार्थना करे कि परमेश्वर आपसे बात करे आपको वो वचन दे जिसकी आपको जरूरत हो परमेश्वर आपको जो भी वचन दे उसके अनुसार करे उसकी बात को सुने। क्योकि 1पतरस 5-7 के अनुसार: अपनी सारी चिंता उसी पर डाल दो क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है

और जब हमारे लिए आनंद का समय है उस समय हम उसकी स्तुति करे उसकी आराधना करें। 
यहोवा की महिमा के कारण प्रफुल्लित हों; और अपने बिछौनों पर भी पड़े पड़े जयजयकार करें।
पर देखने को मिलता हैं कि जब हमारे लिए आनन्द का समय होता हैं तो उस समय हम और बातो में समय बिताना शुरू कर देते हैं जैसे चर्च के समय मे घूमने चले गए, किसी व्यक्ति के लिए फ़ोन की जरूरत थी परमेश्वर ने दिया अब उसी फ़ोन को संगति के बीच मे इस्तेमाल करेंगे। अगर हम ऐसा करने में व्यस्त हैं तो रुक जाइये और परमेश्वर को पहला स्थान दीजिये वस्तुओ या किसी मनुष्य को नही। और उसकी स्तुति कीजिये।वरना आप जानते हैं क्या हो सकता है, प्रभु अपनी महिमा किसी को चुराने नहीं देता। 
आमीन 
परमेश्वर आप सभी को आशीष करे
रैव्ह राजेश गिरधर
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