आज अधिकतर विश्वासियों के जीवन को पाप के कीड़े ने खा कर बरबाद कर दिया है। हमारे द्वारा लिए गए गलत निर्णयों की वजह से हम पाप करते है जो हमे अन्दर से खोखला कर देते हैं और हमारे लिए यही पाप कष्टदायक बन जाते हैं। हम चाहे ऊपर या बाहर से ठीक दिखाई दें लेकिन पाप हमें अन्दर ही अन्दर काटता रहता है। हम सब पाप के इन दुष्परिणामों को अपने व्यक्तिगत अनुभवों से जानते हैं।बाइबल के अनुसार, पाप परमेश्वर के मार्गों में चलने की अपेक्षा अपने स्वयं के मार्गों पर चलने का एक व्यवहार है। जब हम अपनी मनमानियां करते है तो पाप हमारे जीवन में आता है और शैतान का यह निरंतर प्रयास रहता है कि वह हमें पाप में बनाए रखे, हमें बिगाड़े रखे तथा नाश की ओर ले जाए। लेकिन जगत की ज्योति प्रभु यीशु मसीह हमारी पाप से बिगड़ी दशा में भी हमें स्वीकार करते है तथा हम में होकर अपनी ज्योति को संसार के समक्ष प्रकट करते है!. *”यीशु ने कहा, मैं भी तुझ पर दंड की आज्ञा नहीं देता; जा, और फिर पाप न करना।”* युहन्ना -8=11
प्रार्थना :—
परमेश्वर हम सब आप के प्रति समर्पित और ईमानदार बने और अपना जीवन आपके हाथो में दें,ताकि हम सब पाप से निकलकर आपकी इच्छा के अनुसार जीवन जी सकेI परमेश्वर आप सभी को आशीष दें और अपनी दया अनुग्रह प्रेम करुणा और शान्ति हमेशा हम सब पर बनाये रखे।
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर

