जब हम प्रार्थना करते हैं,उसका उत्तर नहीं मिलता ; या उत्तर हमारे सोच के अनुसार नहीं होता| प्रार्थनाओं के उत्तर में देरी हो जाती है तो यह हमे समस्या की तरह लगने लगती है| वचन कहता है ख़ुदा के वायदे और प्रतिज्ञाएं अटल हैं| प्रतिज्ञाएं पूरी होंगी, मगर उसकी कुछ शर्तें भी हैं| ख़ुदा की ओर देखने से पहले, हमें अपनी ओर देखना भी ज़रूरी है| ये तो निश्चित है, कि ग़लती परमेश्वर की ओर से नहीं हो सकती है| ज़िन्दगी में हमारी कमियां ही, दुआओं में बाधा बनती हैं|* कई बार हमें विश्वास होता है, और नहीं भी होता है| या ख़ुदा के साथ आपके रिश्ते, ठीक नहीं होते हैं| *खुदा के साथ रिश्तों में गहराई होना बहुत ज़रूरी है, वरना कुछ भी हासिल नहीं होता|* ख़ुदा आपसे जितनी मुहब्बत करता है, क्या आप भी उससे उतनी ही मुहब्बत करते हैं? ख़ुदा को देने के लिए, आपके पास कितना वक़्त है? वचन पढ़ने में, आप कितना समय ख़र्च करते हैं? *ख़ुदा से रिश्ता जितना क़रीबी होगा, उतनी ज़्यादा आपकी दुआएं सुनी जाएंगी|
यशायाह 65:24 में लिखा है —उनके पुकारने से पहले ही, मैं उनको उत्तर दूंगा ; और उनके मांगते ही, उनकी सुन लूंगा| वो देखने और सुनने वाला ख़ुदा है| ख़ुदा की नज़र आप पर है, क्या खुदा आपकी नज़र में है?
हम कहते हैं:- खुदा मेरे दिल में वास कर, क्या कभी यह भी कहा मैं भी तेरे दिल में वास करू।
सच में :- हम खुदा से जुदा है,
खुदा हमसे जुदा नहीं है
पुकार कर देखिए वो हमेशा हमारे साथ भी है और पास भी है।
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर

