इस संसार में कोई शख्स ऐसा नहीं है , जिसकी ज़िंदगी में परेशानियां न हों। सुख- दुःख , धूप – छांव की तरह आते जाते रहते हैं| बहुत से लोग कहते हैं यदि जीवन में परेशानियां न हो तो , ज़िन्दगी बेरंग हो जाए। परेशानियों के दौरान आपके पास दो हो विकल्प होते हैं– (1) – परेशानियों से भागना- अगर परेशानियों से भागेंगे , तो कहां तक और कब तक भागेंगे।(2) — परेशानियों का सामना करना। समस्याएं आनी ही हैं , तो क्यों न ख़ुद को मानसिक रूप से तैयार रखें| हारे हुए सैनिक का साथ तो उसका साया भी नहीं देता…
Author: Rajesh Ranjan Nirala
एक बड़ी चट्टान में से एक छोटा टुकड़ा खोदकर निकाला जाय तो, बड़ी चट्टान के सारे गुण यह छोटे टुकडे में मिलेंगे। इसी प्रकार हम प्रभु यीशु की ओर ताकते रहें तो प्रभु यीशु मसीह के सारे गुण और लियाकत हमारे अन्दर उंडेल दिये जाते हैं। वह स्वयं हमारे जीवन के लिए एक मिसाल है। हम किसी सलाह और मदद के लिये मनुष्य की ओर देखेंगे तो हम निराश हो जायेंगे और ठोकर खायेंगे। परन्तु हमें निरन्तर प्रभु को हमारी धार्मिकता और जीवन के रूप में देखना चाहिये, और वह हमें उसके गुणों से भर देगा। आपको यदि उसके जैसा…
आज के समय में बहुत सारे लोगो की सोच बन गयी हैं कि हम दीन क्यो बने। इस कारण से आज संसार दीनता को महत्व नही देता हैं। लेकिन परमेश्वर ने अपने वचनों में हमेशा दीनता को ही प्राथमिकता दी हैं।दीन होने का मतलब है कि हम अपने दुर्बलताओं के बारे में जाने और परमेश्वर से हमे जो आशीषें मिली हैं उसके लिए हम परमेश्वर को धन्यवाद दे। हमें दीन इसलिए बनना है क्योंकि हम प्रभु के सिवाय और किसी पर घमण्ड नही कर सकते।हमारा मूल्य और फलवन्त होना प्रभु पर निर्भर हैं और परमेश्वर की सहायता के बिना हम कुछ…
जब ट्रेन किसी सुरंग में से गुजरती है और एकदम से अंधेरा हो जाता है तो आप अपनी टिकट को फेक कर ट्रेन से बाहर नही कूदते हो, क्योकि आप को ट्रेन चलाने वाले पर भरोसा होता है। ……इसी तरह…… जब जिंदगी की ट्रेन मुश्किलात दुखो और तकलीफों के अंधेरे से गुजर रही हो तो जिंदगी की ट्रेन को चलाने वाले पर भरोसा रखो, वो अंधेरो से जरूर निकाल देगा। बस कभी कभी ये सुरंग छोटी होती है तो कभी कभी बहोत लम्बी, पर यकीन रखो सुरंग ही है । जिसके दूसरी तरफ रोशनियां और उजाला ही उजाला होता है…
कहते हैं इज्ज़त की दौलत से बढ कर कोई दौलत नहीं | इज्ज़त वो है जो दिल से की जाती है| किसी ज़माने में महायाजकों , फ़रिसियों और शास्त्रियों का एक ख़ास मुकाम होता था| ये चाहते थे की लोग उनकी इज्ज़त करें , ये अपने आप को किसी ख़ुदा से कम समझते थे| आज भी हर जगह इज्ज़त की बड़ी मारा मारी है , ऐसे भी दौलतमंद देखे गए हैं , जिनके बैठने के लिए ख़ास बैंच होती है| और जिनके पास कुछ सरकारी अधिकार हैं , वो भी अपने आप को किसी ख़ुदा से कम नहीं समझते, यहुन्ना:-5=44…
वक़्त की कमी ; ज़िन्दगी की भाग दौड़ , इन सब ने मिलकर इंसान को तोड़ कर रख दिया है| ना सिर्फ़ घर छोटे होते जा रहे हैं , बल्कि इंसान का दिल भी छोटा होता जा रहा है| इंसान धीरे धीरे , खुदगर्ज़ होता जा रहा है , और रिश्तों में दूरियां बढ़ती जा रही हैं| इस सफ़र में हम अपने पूर्वजों की संस्कृति से कितना दूर निकल आये है| घर की मुंडेर पर कौआ बोले , तो लोग ख़ुश हो जाते थे , कि मेहमान आने वाला है| किसी शायर ने क्या ख़ूब लिखा है — बहुत दिनों…
प्रभु की प्रार्थना।ऐ हमारे पिता तू जो स्वर्ग मे है- मत्ती 6:9प्रार्थना में परमेश्वर की आराधना होती हैं। पिता परमेश्वर हम से प्रेम करता हैं हमारी चिंता करता हैं तथा हमारी संगति व घनिष्टता का स्वागत करता है, मसीह के द्वारा हमारी पहुँच आराधना के लिए भी हैं ताकि हम अपनी आवश्यकताएँ बता सके जैसे हम अपने सांसारिक पिता को बताते हैं। लेकिन यह सांसारिक पिता से बढ़कर हैं। वह आशीष व दण्ड दोनो दे सकता हैं। वह अपने बच्चों को क्या प्रतिक्रिया देता हैं वह हमारे विश्वास और आज्ञाकारिता पर निर्भर करता हैं। तेरा नाम पवित्र माना जाए। मत्ती…
अपने लिए नहीं दूसरों के लिए जीना ही सच्चा जीवन है:-दुनिया में कोई भी चीज़ अपने आपके लिए नहीं बनी । दरिया – : खुद अपना पानी नहीं पीता । पेड़ – : खुद अपना फल नहीं खाते । फूल – : अपनी खुशबु अपने लिए नहीं बिखेरते ।मधुमक्खी – : खुद अपना शहद नही खाती ! मालूम है क्यों .. ?? ” क्योंकि दूसरों के लिए ही जीना ही असल जिंदगी हैं । 🌹🙏
परमेश्वर ने जो कुछ भी बनाया सुन्दर ही बनाया, चाहे वो प्रकृति हो , नदियां हो , झरने हो , जानवर हो , या सबसे खूबसूरत इन्सान , परमेश्वर ने जो कुछ भी बनाया स्वतंत्र इच्छा से सुन्दर ही बनाया मगर परमेश्वर की बाकी कलाकृतियों को हम छोड दें तब उसमे से जो मनुष्य है वही सिर्फ पाप करता है , उसी को अपनी सुन्दरता पर घमंड होता है, कभी पहाड अपनी ऊँचाई पर घमण्ड नहीं करता , नदी अपने पानी पर घमण्ड नहीं करती , पैड पौधे अपनी सुन्दरता पर घमंण्ड नहीं करते , जानवर कभी घमण्ड नही करते…
जब परमेश्वर ने मछली रचना चाहा, तो उन्होंने समुद्र से बात की। जब परमेश्वर ने पेड़ बनाना चाहा, तो उन्होंने धरती से बात की। लेकिन जब परमेश्वर ने मनुष्य बनाना चाहा, तो उन्होंने खुद की ओर रुख किया। तो परमेश्वर ने कहा: “आइए हम मनुष्य को अपने स्वरूप और समानता में बनाएं”। ध्यान दें: – अगर आप पानी में से एक मछली निकालते हैं, तो वह मर जाएगी ;और जब आप किसी पेड़ को जमीन से हटाते हैं, तो वह भी मर जाता है। इसी तरह, जब मनुष्य परमेश्वर से अलग हो जाता है, तो वह मर जाता हैपरमेश्वर हमारा प्राकृतिक वातावरण है। हम उसकी मौजूदगी…