प्रभु की प्रार्थना।
ऐ हमारे पिता तू जो स्वर्ग मे है-  मत्ती 6:9
प्रार्थना में परमेश्वर की आराधना होती हैं। पिता परमेश्वर हम से प्रेम करता हैं हमारी चिंता करता हैं तथा हमारी संगति व घनिष्टता का स्वागत करता है, मसीह के द्वारा हमारी पहुँच आराधना के लिए भी हैं ताकि हम अपनी आवश्यकताएँ बता सके जैसे हम अपने सांसारिक पिता को बताते हैं। लेकिन यह सांसारिक पिता से बढ़कर हैं। वह आशीष व दण्ड दोनो दे सकता हैं। वह अपने बच्चों को क्या प्रतिक्रिया देता हैं वह हमारे विश्वास और आज्ञाकारिता पर निर्भर करता हैं।
तेरा नाम पवित्र माना जाए। मत्ती 6:9
हमारी प्रार्थनाओ में सबसे अधिक ध्यान और हमारे जीवनों में भी परमेश्वर के नाम को पवित्र कहना होना चाहिए।

तेरा राज्य आए। मत्ती 6:10
यह प्रार्थना करना कि तेरी इच्छा पूरी हो का अर्थ है निष्कपटता से इच्छा करना कि परमेश्वर की इच्छा व उद्देश्य हमारे परिवारों के जीवन में पूरी हो, उसकी अनन्त योजना के अनुसार।

प्रतिदिन की रोटी। मत्ती 6:11
प्रार्थना में व्यक्ति की वचन की आवश्यकता व दैनिक आवश्यकताओं के लिए निवेदन होना।
अपराध को क्षमा करना। मत्ती 6:12
हमें दूसरो के अपराध को क्षमा करना सीखना चाहिए ताकि वैसी ही क्षमा हमें हमारी गलतियों की मिलने पाए।
हमें बुराई से बचा। मत्ती 6:13
हमें प्रार्थना करना है कि संसार की बुराइयों से परमेश्वर हमें बचाएं।
आमीन
परमेश्वर आप सभी को आशीष करें।
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