परमेश्वर ने जो कुछ भी बनाया सुन्दर ही बनाया, चाहे वो प्रकृति हो , नदियां हो , झरने हो , जानवर हो , या सबसे खूबसूरत इन्सान , परमेश्वर ने जो कुछ भी बनाया स्वतंत्र इच्छा से सुन्दर ही बनाया मगर परमेश्वर की बाकी कलाकृतियों को हम छोड दें तब उसमे से जो मनुष्य है वही सिर्फ पाप करता है , उसी को अपनी सुन्दरता पर घमंड होता है, कभी पहाड अपनी ऊँचाई पर घमण्ड नहीं करता , नदी अपने पानी पर घमण्ड नहीं करती , पैड पौधे अपनी सुन्दरता पर घमंण्ड नहीं करते , जानवर कभी घमण्ड नही करते , सिर्फ मनुष्य ही है जो परमेश्वर के विरुद्ध पाप भी करता है ; और घमंण्ड तो उसमें इतना है कि वो अपने आगे किसी को कुछ समझता ही नहीं ।

जिसके पास ज्यादा पैसा है वो उस पर घमण्ड करता है , कोई अपनी ताकत पर घमण्ड करता है , कोई अपनी खूबसूरती पर घमड करता है न जाने क्यों ? जबकि सब जानते हैं यह सब बैकार है, एक दिन ऐसा आएगा जब यह ताकत, सुन्दरता, पैसा साथ छोड देगी , अपना खुद का चैहरा भी आईने में देखकर यकीन नहीं होगा यह मैं हूँ,या कोई और? अपना शरीर भी साथ छोड देगा , दवाओं के सहारे जीवन चलने लगेगा , हर समय एक सहारे की आवश्यकता होगी ; और जब इस शरीर से आत्मा निकाल ली जाएगी तो यही शरीर जिस पर सबको घमण्ड होता है , खुद के परिवार वालों को गन्दा लगने लगेगा कहेंगे जल्दी से इसे दफनाओ नहीं तो बदबू आ जाएगी ? जब सब जानते हैं , यह हाल होनेवाला है तो घमण्ड किस लिये ? क्योंकि परमेश्वर घमण्डी लोगों से नफरत करता है वह घमण्डी लोगों की सुन्दरता को ताकत को बुद्बिमान की बुद्बि को नष्ट करता है , मनुष्य कितना ही अपने आप को इन से बचाने का प्रयास करे ; मगर परमेश्वर सब को नष्ट करता है , और सब अभिमानियों को मिट्टी में मिला देता है । जब मिट्टी में मिलना ही है तो घमण्ड किस लिये। सभोपदेशक की पुस्तक में साफ साफ लिखा है:- सब कुछ व्यर्थ है सुन्दरता , बुद्बि , ताकत , राजपाठ , सब जाता रहेगा तो क्यों न आज ही इस घमण्ड को अपने आप से दूर करके प्रेम का जीवन बिताएँ ताकि सब व्यर्थ है तो साधारण बनकर जीवन जीएँ और लोगों को भी जीने दें ।और प्रभु की आशीष पाऐं
आमीन
प्रभु हम सबको समझने की बुद्धि दे
रै्व्ह राजेश गिरधर
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