एक बड़ी चट्टान में से एक छोटा टुकड़ा खोदकर निकाला जाय तो, बड़ी चट्टान के सारे गुण यह छोटे टुकडे में मिलेंगे। इसी प्रकार हम प्रभु यीशु की ओर ताकते रहें तो प्रभु यीशु मसीह के सारे गुण और लियाकत हमारे अन्दर उंडेल दिये जाते हैं। वह स्वयं हमारे जीवन के लिए एक मिसाल है। हम किसी सलाह और मदद के लिये मनुष्य की ओर देखेंगे तो हम निराश हो जायेंगे और ठोकर खायेंगे। परन्तु हमें निरन्तर प्रभु को हमारी धार्मिकता और जीवन के रूप में देखना चाहिये, और वह हमें उसके गुणों से भर देगा। आपको यदि उसके जैसा बनना हो तो विश्वास से कहना पडे़गा, ‘हे प्रभु, आपका जीवन मुझमें उँडे़लो,’ आपको नम्र बनना हो तो उससे कहिये, ‘प्रभु, मुझे आपके समान नम्र और दीन बनाओ।’ आपके शत्रुओं से प्रेम करना हो तो उससे कहिये, ‘उन्हें माफ कर, क्योंकि वे जो कर रहे हैं उसे वे जानते नहीं है, ऐसा कहकर जो प्रेम आपने अपने दुश्मनों के प्रति दिखाया वही प्रेम मुझे भी दो।’ इसी प्रकार जब हमारी निंदा होती है तब हम उसकी ओर फिरते हैं और इस प्रकार हम ईश्वरीय गुणों को प्राप्त करते हैं।
          ये सभी गुण, कृपा और सहनशीलता हमारे खुद के यत्नो से नहीं आतें है। यदि आप कहे कि ‘मैं नम्र बनूँगा तो आप ज्यादा अभिमानी हो जायेंगे और इसी प्रकार आप कहेंगे कि ‘मैं क्रोध नहीं करूँगा’ तो आप ज्यादा क्रोधित हो जायेंगे। अपने यत्न से आप कभी भी इन गुणों को प्राप्त करने में सफल नहीं होंगे। इसलिये विश्वास से उससे कहिये, ‘हे प्रभु, आप मेरी धार्मिकता हो। आपने मुझे आपना स्वभाव दिया है। प्रभु इस समय मैं परीक्षाओं में आ पड़ा हूँ। आपका खुद का जीवन मुझे दो और मुझे जयवन्त बनाओ।’ इस रीति से आप जयवन्त होंगे। यदि आप उसकी ओर नहीं फिरेंगे तो आप हार जायेंगे।
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर
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