कहते हैं इज्ज़त की दौलत से बढ कर कोई दौलत नहीं | इज्ज़त वो है जो दिल से की जाती है| किसी ज़माने में महायाजकों , फ़रिसियों और शास्त्रियों का एक ख़ास मुकाम होता था| ये चाहते थे की लोग उनकी इज्ज़त करें , ये अपने आप को किसी ख़ुदा से कम समझते थे| आज भी हर जगह इज्ज़त की बड़ी मारा मारी है , ऐसे भी दौलतमंद देखे गए हैं , जिनके बैठने के लिए ख़ास बैंच होती है| और जिनके पास कुछ सरकारी अधिकार हैं , वो भी अपने आप को किसी ख़ुदा से कम नहीं समझते, यहुन्ना:-5=44 में येशू आईना दिखाते हुए कहते है — तुम जो एक दूसरे से इज्ज़त चाहते हो पर वो इज्ज़त नहीं चाहते जो खुदा की तरफ से है ये बहुत बड़ी बात है की ख़ुदा हर इंसान को इज्ज़त बख्शना चाहता है| दुनियावी इज्ज़त का क्या , आज है कल नहीं रहेगी| इज्ज़त तो वो है जो जीते जी बनी रहे , और मरने के बाद भी कायम रहे| जो इज्ज़त ख़ुदा बख्शता है , वो हमेशा कायम रहती है। भजनसंहिता–3:3 में लिखा है कि परमेश्वर हमारे मस्तक को ऊंचा करने वाले हैं, और भजनसंहिता–3:4 में लिखा है कि उनकी ओर ताकने वाले कभी शर्मिंदा नहीं होंगे।
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर

