वक़्त की कमी ; ज़िन्दगी की भाग दौड़ , इन सब ने मिलकर इंसान को तोड़ कर रख दिया है| ना सिर्फ़ घर छोटे होते जा रहे हैं , बल्कि इंसान का दिल भी छोटा होता जा रहा है| इंसान धीरे धीरे , खुदगर्ज़ होता जा रहा है , और रिश्तों में दूरियां बढ़ती जा रही हैं| इस सफ़र में हम अपने पूर्वजों की संस्कृति से कितना दूर निकल आये है| घर की मुंडेर पर कौआ बोले , तो लोग ख़ुश हो जाते थे , कि मेहमान आने वाला है| किसी शायर ने क्या ख़ूब लिखा है — बहुत दिनों से कोई मेहमान नहीं आया , कहीं घर से बरकत ना उठ जाए| हम उस युग में जी रहे हैं , जहां मेहमान नवाज़ी , मुसीबत समझी जाती है| मेहमान आता बाद में है , उसके वापस जाने की बात ,पहले पूछी जाती है| इब्रानियों 13:2 में लिखा है –मेहमान नवाज़ी करना ना भूलना , क्योंकि इसके द्वारा , कितनों ने अनजाने में , फ़रिश्तों की मेहमान नवाज़ी की है| मेहमान नवाज़ी एक जज़्बा है , जो दरियादिल लोगों में पाया जाता है| आज किसी के लिए समय निकलना , मंहगा सौदा माना जाता है| चलो बैलगाड़ी के युग में लौट चलें ; किसी के मेहमान बने , किसी को मेहमान बनाएं|
आमीन
प्रभु का अनुग्रह हमेशा आपके साथ हो
रैव्ह राजेश गिरधर

