Author: Rajesh Ranjan Nirala

Source of content: https://www.eknayajeevan.com/Have you ever spent time with another person running a marathon. (Suppose you are also a runner). Have you met a runner who has not been educated about marathon running?Why does this not happen?They too need a boost of enthusiasm. Accountability. They too need people who are waiting for them in the ground at 5:30 in the morning. He also needs a fellow runner with whom he can run, who daunts him to run fast.Do you understand? We also need people who know Jesus. God wants to bring changes in his life.You may be thinking that I…

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इस 7-भाग श्रृंखला के आपके पहले संदेश में आपका स्वागत है।बधाई हो, क्योंकि आपने परमेश्वर के साथ एक रिश्ते कि शुरुआत की है। जब आप अपने जीवन में यीशु को आमंत्रित किया, आपने सबसे मूल्यवान रिश्ते को आरंभ किया — जो एक व्यक्ति को अपने जीवन में मिल सकता है।जिस रात मैंने यीशु को अपने जीवन में स्वीकार किया, मैं जानता था कि यह एक बड़ा फैसला था। मैं वर्षों से एक नास्तिक था। बहुत ज़ोर से हवा में बोलना, और परमेश्वर से बात करना मेरे लिए चिरस्मरणीय था।उतना ही नहीं, मुझे बोध हुआ कि मैं बिल्कुल सही कर रहा हूँ।मेरा प्रार्थना संक्षिप्त था। “ठीक है, आप जीत गए। मैंने आपको में अपने जीवन में आमंत्रित किया। आप जो चाहे मेरे जीवन में कर सकते है”।मेरे मन में,…

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Source of content: https://www.eknayajeevan.com/ Even if Christ is in our lives, we have to recognize that we are human beings.This means that at some point we will work in our own will and not according to God’s will. And this is true of me and the rest of the living believers.Even though we want to please God, trust him, we want to live the Christian life well; However, there is a possibility that we may sin.This article will explain to us what is sin? And we’ll see how sin affects our relationship with God and how it doesn’t.And more than this,…

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परमेश्वर के प्रेम का वर्णन करने के लिए सबसे सटीक शब्द है “अदभुद”। परमेश्वर का प्रेम, मनुष्यो से मिलने वाले प्रेम से बहुत ही अलग है।मेरे विचार सही है कि नहीं इस बात के लिए मैने “अदभुद” शब्द के परिभाषा को देखा।और वह इस प्रकार से है: साधारण से अलग हटके और उम्मीद से बहुत ही बढ़कर।यह बिलकुल सही है। चौंकिए मत परमेश्वर का प्रेम कुछ इस प्रकार से है।: http://eknayajeevan.com/a/unique.html

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परमेश्वर के साथ आपके रिश्ते कि एक अहम पहलू।इस रिश्ते में आप अकेले नहीं है।यह केवल एक तरफा संवाद नहीं है। ऐसा नहीं है कि आप बस उनकी आराधना करते है, बल्कि वह भी आप में बहुत रूचि रखता है।परमेश्वर हमसे आके मिला।मुझे याद है, शुरुआती दिनों में — जब मैंने प्रभु यीशु को अपने जीवन में आमंत्रित किया तब मेरे मन में बहुत से सवाल थे।वह कैसे दिखता है? क्या उसे मेरा ख्याल है?परमेश्वर मेरे जीवन के बारे में क्या सोचते है?वह मुझे किस प्रकार से देखता है?यह बहुत ही रोचक तथ्य है। बाइबिल में इस प्रकार के सारे…

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क्या आपने कभी मैराथन दौड़ने वाले दूसरे व्यक्ति के साथ समय बिताया है। (मान लीजिए आप भी एक धावक है)। क्या आप ऐसे धावक से मिले है जिसे मैराथन दौड़ की शिक्षा नहीं मिली हो?ऐसा होता नहीं है क्यों?उन्हें भी उत्साह वर्धन की आवश्यकता है। जवाबदेही। उन्हें भी ऐसे लोगो की ज़रूरत है जो उनका सुबह 5:30 बजे मैदान में इंतज़ार कर रहे हो। उन्हें भी संगी धावक की ज़रूरत है जिसके साथ वो दौड़ सके, जो उन्हें तेजी से दौड़ने के लिए ललकारे।आप समझे? हमें भी उन लोगो की ज़रूरत है जो यीशु को जानते हो। जो चाहते है परमेश्वर उनके जीवन में तबदीली…

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ज़िन्दगी में एक नयी रिश्ते की शुभारंभ करना जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि हम नहीं जानते यह रिश्ता कब तक कायम रहेगा। हो सकता है दूसरे व्यक्ति की मौत हो जाये, या फिर वह सम्बन्ध तोड़ दे, या फिर वह इस रिश्ते से ऊब जाये।परन्तु जब परमेश्वर के साथ रिश्ते की बात आती है, तो यह पूर्ण रीति से सुरक्षित है। परमेश्वर हमें छोड़ के कही नहीं जायेगा। अगर हम उसके प्रति अविश्वासयोग्य है तौभी वह विश्वासयोग्य रहेगा। ऐसा इसलिए नहीं है कि परमेश्वर हमारे आधीन है। वह डरपोक किस्म का नहीं है।ऐसा इसलिए है क्योंकि उसने हमें गोद लिया…

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भले ही मसीह हमारे जीवन में है तभी भी यह बात हमें मानना होगा कि हम एक मनुष्य है।इसका अर्थ यह है की कभी कबार हम अपनी मर्ज़ी में काम करेंगे ना की परमेश्वर की इच्छा अनुसार। और यह बात मेरे बारे में और बाकी जीवित विश्वासियों के बारे में सही ही है।भले ही हम परमेश्वर को खुश करना चाहते है, उस पर भरोसा करना चाहते है, मसीही जीवन को अच्छे से जीना चाहते है; तौभी सम्भावनाएं है की हम पाप करे।यह लेख हमें स्पष्ट करेगा की पाप क्या है? और हम यह देख्नेगे की पाप परमेश्वर के साथ के…

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आपने ध्यान दिया होगा, हम सब के साथ एक जैसे बातचीत नहीं करते। आप जिस प्रकार से अपने बॉस से व्यवहार करते है शायद अपने स्टोर क्लर्क से वैसे नहीं। जो ख़ास बाते आप अपने मित्र से करते है शायद अपनी माँ से नहीं। हो सकता है आपको शाबाशी मिले।अब जब आप परमेश्वर के साथ एक रिश्ते में है, आपको क्या लगता है की वह हमसे क्या चाहता होगा?इस प्रश्न का उत्तर आपको चौंका सकता है। ऐसा नहीं है की — अच्छा बनना है, गलत काम नहीं करना है या फिर परमेश्वर की बहुत ज़्यादा कठिन सेवा करनी है या फिर…

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