परमेश्वर के साथ आपके रिश्ते कि एक अहम पहलू।
इस रिश्ते में आप अकेले नहीं है।
यह केवल एक तरफा संवाद नहीं है। ऐसा नहीं है कि आप बस उनकी आराधना करते है, बल्कि वह भी आप में बहुत रूचि रखता है।
परमेश्वर हमसे आके मिला।
मुझे याद है, शुरुआती दिनों में — जब मैंने प्रभु यीशु को अपने जीवन में आमंत्रित किया तब मेरे मन में बहुत से सवाल थे।
- वह कैसे दिखता है? क्या उसे मेरा ख्याल है?
- परमेश्वर मेरे जीवन के बारे में क्या सोचते है?
- वह मुझे किस प्रकार से देखता है?
यह बहुत ही रोचक तथ्य है। बाइबिल में इस प्रकार के सारे सवालो के जवाब मिलते है और बहुत सी जानकारियां भी।
अब चूंकि आप परमेश्वर के साथ रिश्ते में है, आप पाएंगे की जब आप बाइबिल पढ़ते है तब परमेश्वर आपसे व्यक्तिगत रीति से बातचीत कर रहा है। वह अपने आप को प्रकट करेगा। वह आपके ह्रदय से बात करेगा।
मुझसे यह न पूछे कि वह कैसे बात करता है। लेकिन वह बहुत ही स्पष्ट तरीके से बातचीत करता है।
क्या आपके पास बाइबिल है? अगर नहीं, तो आप पास के मसीही पुस्तकालय से प्राप्त कर सकते है या फिर अमेज़न.कॉम पर भी उपलब्ध है।
आप बाइबिल को इंटरनेट में ऑनलाइन भी पढ़ सकते है:
http://www.BibleGateway.com, h
अब हम देखेंगे कि बाइबिल कैसे पढ़ना है। यह कोई मुश्किल बात नहीं है।
http://eknayajeevan.com/a/
मान लीजिए की आपने बाइबिल में से यह वाक्य पढ़ा — “परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम किया कि अपने एकलौते पुत्र को दे दिया….”
अब मैं आप से पूछता हूं कि — इस संसार के लोगो के प्रति परमेश्वर की क्या भावना है? आप को बहुत दूर तक सोचने की आवश्यकता नहीं है बस विचार करें कि परमेश्वर कि क्या सोच होगी मनुष्यो के प्रति?
अभी आपने बाइबिल से जो आयत पढ़ा उसमे ध्यान दे — “परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम किया ….. इसमें हमें परमेश्वर की सोच दिखाई पड़ती है — वह हमसे प्रेम करता है।
आशा करता हूँ आपको समझ आ रहा है।
आइए हम विस्तार से बाइबिल मनन करे, आप ज़रूर आनन्दित होंगे। तब हम जानेंगे की परमेश्वर हमारे साथ किस प्रकार रिश्ता निभाता है।

