ज़िन्दगी में एक नयी रिश्ते की शुभारंभ करना जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि हम नहीं जानते यह रिश्ता कब तक कायम रहेगा। हो सकता है दूसरे व्यक्ति की मौत हो जाये, या फिर वह सम्बन्ध तोड़ दे, या फिर वह इस रिश्ते से ऊब जाये।

परन्तु जब परमेश्वर के साथ रिश्ते की बात आती है, तो यह पूर्ण रीति से सुरक्षित है। परमेश्वर हमें छोड़ के कही नहीं जायेगा। अगर हम उसके प्रति अविश्वासयोग्य है तौभी वह विश्वासयोग्य रहेगा। ऐसा इसलिए नहीं है कि परमेश्वर हमारे आधीन है। वह डरपोक किस्म का नहीं है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि उसने हमें गोद लिया है, हमें अपना संतान बना लिया है। परमेश्वर हमसे प्रेम करता है और वह इस रिश्ते को अनंतकाल के लिए निभाना चाहता है।

यह लेख परमेश्वर के साथ के अनंतकाल के रिश्ते का वर्णन करता है।:  http://eknayajeevan.com/a/willthislast.html    

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