इस 7-भाग श्रृंखला के आपके पहले संदेश में आपका स्वागत है।

बधाई हो, क्योंकि आपने परमेश्वर के साथ एक रिश्ते कि शुरुआत की है। जब आप अपने जीवन में यीशु को आमंत्रित किया, आपने सबसे मूल्यवान रिश्ते को आरंभ किया — जो एक व्यक्ति को अपने जीवन में मिल सकता है।

जिस रात मैंने यीशु को अपने जीवन में स्वीकार किया, मैं जानता था कि यह एक बड़ा फैसला था। मैं वर्षों से एक नास्तिक था। बहुत ज़ोर से हवा में बोलना, और परमेश्वर से बात करना मेरे लिए चिरस्मरणीय था।

उतना ही नहीं, मुझे बोध हुआ कि मैं बिल्कुल सही कर रहा हूँ।

मेरा प्रार्थना संक्षिप्त था। “ठीक है, आप जीत गए। मैंने आपको में अपने जीवन में आमंत्रित किया। आप जो चाहे मेरे जीवन में कर सकते है”।

मेरे मन में, मैं बस परमेश्वर के अस्तित्व को स्वीकार कर रहा था। परमेश्वर होने के नाते, यह मुझे सही लगा कि उसे मेरे जीवन को प्रभावित करने का अधिकार है।

पहली बात जो मैंने परमेश्वर के बारे में समझा है: परमेश्वर अदृश्य है। (मैं आश्चर्यचकित हुआ, आप?) लेकिन वास्तव में, यह एक मुद्दा था।

मेरा मतलब है, जब आपने यीशु को अपने जीवन में आमंत्रित किया, तो कैसे हम निश्चित हो सकते है कि वह यहाँ है? तुम उसे नहीं देख सकते। तुम्हें कैसे पता है कि वह वास्तव में तुम्हारे जीवन में प्रवेश किया?

क्या यह अपनी अपनी आस्था की बात है? या फिर आपने अपने दुआ मे जो कुछ कहा? या फिर आप कैसे लग रहा है?

नहीं, इन मे से कुछ भी नहीं।

तुम्हें पता है, तुम्हारा अब परमेश्वर के साथ एक रिश्ता है। क्योंकि उसने पेशकश की और आपने बस अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

यह लेख आपको स्पष्ट समझाएगा कि कैसे आप अपने जीवन में निश्चित हो सकते है कि यीशु आपके जीवन में है — और क्या मतलब है इसका!

क्या मेरे जीवन में परमेश्वर है? (http://eknayajeevan.com/a/amichristian.html)

जब आप उस निर्णय को लिया और यीशु को अपने जीवन में आमंत्रित किया, तो यह जानना महत्वपूर्ण है, कि क्या परमेश्वर तुम्हारी सुनी है? हाँ। यीशु ने वादा किया है कि वह हमारे जीवन में प्रवेश करेगा यदि हम उसे आमंत्रित करे।

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