Author: Rajesh Ranjan Nirala

बाइबिल का यह वचन हमें इस बात की ओर इशारा करता है हम मनुष्य परमेश्वर को अपनी अच्छाइयों के द्बारा प्रसन्ना नहीं कर सकते ? कुछ लोगों का मानना है हमारे अच्छे काम़ो के द्बारा हम परमेश्वर को प्राप्त कर सकते हैं , उद्बार पा सकते हैं , बलिदान चडाकर परमेश्वर को खुश कर सकते हैं ; जो कि परमेश्वर नहीं चाहता ।वो तो बस इतना चाहता है हम उसके भय को समझे , और उस भय में रहकर ही अपने प्रेम को दूसरों को भी दिखाते रहें , खुद प्रेम से रहें , दूसरों को भी प्रभु के प्रेम मे…

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जब भी हम इस संसार में भटकने लगते हैं तब तब परमेश्वर हमें आवाज लगा कर वापस बुलाता है वह एक नहीं दो बार बौलता है मगर हम परमेश्वर की इस वाणी को सुनकर अनसुना करते या फिर सुन ही नहीं पाते हैं ।क्योंकि हम अपने मनों को इतना कठोर कर चुके होते हैं कि हम बचना ही नही चाहते उस आग की ओर बडते जाते हैं जो हमें पल पल जलाने के लिये तैयार है ।जब जब इस्राएली परमेश्वर को त्याग देते व दूसरे देवताओं के पीछे हो लेते थे तब तब परमेश्वर उनके पास भविष्यव्कता को भेजता था…

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परमेश्वर के और हमारे प्रभु यीशु की पहचान के द्वारा अनुग्रह और शान्ति तुम में बहुतायत से बढ़ती जाए।क्योंकि उसके ईश्वरीय सामर्थ ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिस ने हमें अपनी ही महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया है।जिन के द्वारा उस ने हमें बहुमूल्य और बहुत ही बड़ी प्रतिज्ञाएं दी हैं: ताकि इन के द्वारा तुम उस सड़ाहट से छूट कर जो संसार में बुरी अभिलाषाओं से होती है, ईश्वरीय स्वभाव के सहभागी हो जाओ।और इसी कारण तुम सब प्रकार का यत्न करके, अपने विश्वास…

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कोई किसी बलवान व्यक्ति के लिये मरे , या कोई किसी बडे व्यक्ति के लिये मरे जैसा कि हम देखते हैं कुछ लोग अपने नेता के लिये अपनी जान दे देते हैं यह सही है या गलत यह तो उस व्यक्ति पर निर्भर करता है ।पर इस संसार में कोई किसी निर्बल के लिये मरे यह हो नहीं सकता अगर कोई हमसे कहे यह जो सडक पर मजदूर काम कर रहे हैं इनके लिये मरो , या कहे कि जो यह गरीब सडक पर भिखारी बैठें हैं इनके लिये मरो , या कोई कहे कि जो अस्पतालों में मरीज पडे…

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धर्मी को अधर्मी द्बारा रखे धन का हिस्सा मिलता है यह एक सच्चाई है जो बाइबिल पुराने नियम से ही हमको समझाती आ रही है ।नया नियम भी यही कहता है नाशवान भोजन के लिये मेहनत न करो , और न ही संसारिक वस्तुओं के पीछे भागो परन्तु स्वर्ग राज्य की खोज करो यह सब तो तुम्हें यूँ ही मिल जाएगा ; और मिला भी पुराना नियम जब पढते हैं तो हम पाते हैं किस प्रकार चालीस सालों तक परमेश्वर ने इस्राएली लोगों को स्वर्ग की रोटी दी , हर रोज उनके डेरे के बाहर मन्ना गिरता था जिसे वो…

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इंसान की ज़िंदगी में परमेश्वर को वो एहमियत नहीं मिलती है, जिसका की परमेश्वर हक़दार है, जबकि ज़िन्दगी उसी की देन हैं,दुआओं के ना सुने जाने की, यह भी एक बड़ी वज़ह हो सकती है। क्या हम पूर्ण रूप से परमेश्वर के वचन को मान्यता देते हैं, क्या वो हमारे लिए सबसे पहला स्थान है। वो अल्फ़ा और ओमेगा है, वो ही आदि और अन्त है, प्रकाशितवाक्य 21:6, में लिखा हैं :- मैं अलफा और ओमेगा, आदि और अन्त हूं: मैं प्यासे को जीवन के जल के सोते में से सेंतमेंत पिलाऊंगा। इसका मतलब यह ही नहीं है कि वो पहला और…

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परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करे।और परमेश्वर ने जगत के नीचों और तुच्छों को, वरन जो हैं भी नहीं उन को भी चुन लिया, कि उन्हें जो हैं, व्यर्थ ठहराए। (कुरिन्थियों 1:27-28)जब परमेश्वर हमें अपने कार्यों के लिए चुनते हैं तो हम जान जाते हैं कि परमेश्वर ने हमें इसलिए नही चुना की हम अच्छे हैं या हम योग्य हैं।बल्कि इसलिए किवचन कहता है कि उसने जगत के मूर्खों को चुन लिया। ऐसा इसलिए किया ताकि…

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हम सबका हर पल ,हर क्षण और हर समय यह अंगिकार होना चाहिए कि यीशु ने मेरे लिए स्वर्ग में एक ऐसा स्थान तैयार किया है जो मेरी आँखों ने कभी नहीं देखा है. और मेरी कल्पना कभी भी कल्पना नहीं कर सकती। वह चाँदी और सोना, हजारों हजार पहाड़ियों पर मवेशियों का मालिक है। पृथ्वी उसी की है। उसने सभी चीजों को बनाया है जो मौजूद हैं। उसके लिए मेरी ज़रूरतों को पूरा करना बिल्कुल भी कठिन नहीं है चाहे वह पैसा हो या रहने का स्थान या और कुछ वह सर्वशक्तिमान, सदा उपस्थित और सब कुछ जानने वाला…

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हमारा परमेश्वर हमारा शरणस्थान है जिसकी शरण में आकर हम हमेशा अपने को पूरी तरह से सुरक्षित पाते है, जिस प्रकार मुर्गी अपने बच्चों को अपने पंखों के भीतर छुपा लेती फिर चाहे कितनी ही आंधीयां आएँ कितनी भी बरसात पडे उसके पंखों तले बच्चे सुरक्षित रहते हैं बिना डरे अन्दर रहते हैं वैसे ही हमारा परमेश्वर भी है ।इस संसार रुपी जहाज पर जिसमें हम सवार होकर चल रहे हैं , यह कभी तुफानों में फसता है , कभी खाईयों से होकर इसे गुजरना पडता है ,कभी चोरों और डाकुओं के क्षेत्र से होकर जाना पडता है , कभी…

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“धन्य वे हैं जिन्हों ने बिना देखे विश्वास किया॥ शद्रक , मेशक , अबेदनगो को हम सब जानते है…जब राजा नबूकदनेस्सर ने सबको मूरत केे सामने दण्डवत् करने की आज्ञा दी…तब उस समय शद्रक , मेशक और अबेदनगो को छोड़ कर सब लोगो ने मूरत को दण्डवत् किया… और तब राजा क्रोधित होकर उन तीनो को धधकते हुए आग केे भट्ठे में डाल देता है…तभी भी उन तीनो को यह विश्वास था की परमेश्वर उनकी रक्षा करेंगे… और ठीक ऐसा ही हुआ…परमेश्वर ने उन तीनों को धधकते हुए आग केे भट्ठे में जलने से बचाता है lऔर शद्रक , मेशक…

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