परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करे।
और परमेश्वर ने जगत के नीचों और तुच्छों को, वरन जो हैं भी नहीं उन को भी चुन लिया, कि उन्हें जो हैं, व्यर्थ ठहराए। (कुरिन्थियों 1:27-28)
जब परमेश्वर हमें अपने कार्यों के लिए चुनते हैं तो हम जान जाते हैं कि परमेश्वर ने हमें इसलिए नही चुना की हम अच्छे हैं या हम योग्य हैं।
बल्कि इसलिए कि
वचन कहता है कि उसने जगत के मूर्खों को चुन लिया। ऐसा इसलिए किया ताकि लोग इस बात को जाने की कार्य करने वाला परमेश्वर ही है।
कई लोग अकसर ऐसा सोच रखते हैं कि हमारे द्वारा है हम अच्छे से हैं, हमें परमेश्वर की जरूरत नही है और हम सब कुछ कर लेंगे।
लेकिन हम चाहे कितने भी समझदार, बलवान, ज्ञानवान क्यों न हों लेकिन यदि हमारे साथ परमेश्वर नही; तो सब कुछ बेकार है।
जिसके साथ परमेश्वर है वह कमजोर होकर भी ताकतवर है, निर्बल होकर बलवान है, मूर्ख होकर भी ज्ञान वान है।
कई लोग तो परमेश्वर के दासों को तुच्छ समझकर संगति ही छोड़ कर चले जाते हैं उन्हें लगता है हम बहुत समझदार हैं, और हमने बहुत अच्छा किया और अपने पापों और श्रापों में ही मर जाते हैं।
जो अपने ज्ञान और अपने बल पर घमंड करता है वह अपने जीवन को खराब कर रहा है। इसलिए परमेश्वर के राज्य में मूर्ख रहना ही अच्छा है।
और जिसे कुछ भी नही आता परमेश्वर उसके द्वारा भी कार्य कर सकता है क्योंकि काम करने वाला परमेश्वर ही है, हम नही।
क्योंकि क्रूस की कथा नाश होनेवालों के लिये मूर्खता है, परन्तु हम उद्धार पानेवालों के लिये परमेश्वर की सामर्थ्य है। क्योंकि लिखा है, “मैं ज्ञानवानों के ज्ञान को नष्ट करूँगा, और समझदारों की समझ को तुच्छ कर दूँगा।” (कुरिन्थियों 1:18-19)
आमीन
प्रभु आप सबको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर

