जब भी हम इस संसार में भटकने लगते हैं तब तब परमेश्वर हमें आवाज लगा कर वापस बुलाता है वह एक नहीं दो बार बौलता है मगर हम परमेश्वर की इस वाणी को सुनकर अनसुना करते या फिर सुन ही नहीं पाते हैं ।
क्योंकि हम अपने मनों को इतना कठोर कर चुके होते हैं कि हम बचना ही नही चाहते उस आग की ओर बडते जाते हैं जो हमें पल पल जलाने के लिये तैयार है ।
जब जब इस्राएली परमेश्वर को त्याग देते व दूसरे देवताओं के पीछे हो लेते थे तब तब परमेश्वर उनके पास भविष्यव्कता को भेजता था ताकि वो उसकी सुने व बचा लिए जाएँ कुछ लोग तो सुनते थे पर कुछ उनका मजाक उडाते थे ।मगर परमेश्वर उनके लिये हमेशा अच्छा ही सोचता था आज भी वैसा ही हो रहा है लोग जब परेशान होते हैं तब तो परमेश्वर के पास आकर प्रार्थना करते हैं जब ठीक हो जाते तब वो अपनी पुरानी जिन्दगी में वापस लौट जाते हैं जो पापों से भरपूर होती है जिसका मुँह अधोलोक के फाटक के पास है ।
वे काठ से कहते हैं , तू मेरा बाप है , और पत्थर से कहते हैं , तू ने मुझे जन्म दिया है उन्होंने मेरी ओर मुँह नहीं पीठ ही फेरी है ; परन्तु विपत्ति के समय वे कहते हैं , उठकर हमें बचा ।
ऐसा कैसे हो सकता है हम अच्छे समय तो किसी और के पास जाएँ दुख में पास्टर के पास आकर कहें हमारे लिए प्रार्थना कर तो यह कैसा प्रेम है पूरे मन को फिराओ आधे अधूरे मत आओ लौट आओ परमेश्वर के पास वो कोई पत्थर नहीं , न ही कोई लकडी है , वो तो हमारा जीवता परमेश्वर है।
परमेश्वर की आवाज सुनों तो अपने मनों को कठोर न करना ।
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर

