झूठ बोलने वाले कहां से कहां बढ़ गए आपके दिमाग़ में भी शायद ऐसे विचार ज़रूर आते होंगे|ये दुनियां है ; यहां सच और झूठ ; धर्म और अधर्म का संघर्ष होता रहता है| अक्सर देखने में आता है , कि सच बोलने वाले और धर्म की राह में चलने वाले , पीछे रह जाते हैं| अधर्म और झूठ का बोलबाला है| *झूठ बोल कर दौलत कमाना ज़्यादा आसान लगता है| सच बोलने वाले फंस जाते हैं , और झूठ बोलने वाले साफ़ निकल जाते हैं| झूठी तारीफ़ करने वाले अच्छे बन जाते हैं और सच बोलने वाले बुरे| अधर्मी फलते और फूलते हैं , और धर्मी बहुत बार दुःख उठाते हैं|*  इन हालात में हम , परमेश्वर के न्याय व्यवस्था पर शंका करने लगते हैं| परमेश्वर कभी अन्यायी नहीं हो सकता| , फ़िर ऐसा होता क्यों है , या परमेश्वर ऐसा होने क्यों देता है? *अनुग्रह सबके लिए है , परमेश्वर पापियों को भी अवसर देता है| नीतिवचन 24:20 में लिखा है —बुरे मनुष्य को अंत में कुछ फल ना मिलेगा , दुष्टों का दिया बुझा दिया जाएगा|  सुलेमान कहता है —धर्मी चाहे सात बार गिरे , तौभी उठ कर खड़ा होगा ; परन्तु दुष्ट विपत्ति में गिर कर पड़े ही रहते हैं|*  
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर
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