*शैतान का निशाना, आपका विश्वास है| विश्वास है तो सब है , विश्वास नहीं तो कुछ भी नहीं है| हमेशा कोशिश यह कीजिये, कि विश्वास की ज़मीन पर, आपके पैर मज़बूती के साथ जमे रहें| निराशाएं तो आएंगी, मगर उनसे लड़ना आपका काम है| *लोगों के पास बाईबिल है, मगर ख़ुदा का वचन दिल में नहीं है| जब ख़ुदा का वचन दिल में होता है, तब ही जुबां पर होता है| खुदा का वचन जब दिल ओ दिमाग में उतर जाता है, तब ही काम करता है| वरना बाईबिल भी एक क़िताब ही है| जब परमेश्वर की व्यवस्था, आपके दिल में बस जाती है, हालत कैसे भी क्यों ना हों, आपके पैर नहीं फ़िसलेंगे| बाईबिल पढने वालों, और वचन को दिल में उतारने वालों में, ज़मीं और आसमान का फ़र्क है| बाईबिल आपके करीब नहीं, आपके दिल के क़रीब होनी चाहिए। बाईबल को पढ़ने के लिए नही बल्कि समझने के लिए पढ़ें, और विश्वास में मजबूत होते जाएं
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर
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