*हर एक जीवन में कोई ना कोई अंधकार ज़रूर होता है|* चाहे वो पाप का हो , समस्या का हो , असफ़लता का हो या फिर पारिवारिक समस्याओं का| हर कोई किसी ना किसी अंधकार से जूझता नज़र आता है| *अंधकार कैसा भी क्यों ना हो , विश्वास का चिराग़ जलते रहना चाहिए|* अंधकार उस वक़्त और गहरा हो जाता है , जब विश्वास का चिराग़ भी बुझने लगता है| *कोई भी रात इतनी लम्बी नहीं होती , जिसकी सुबह ना हो| कोई अन्धाकर ऐसा नहीं है , जिसे मिटाया ना जा सके| परमेश्वर का वचन , हमारी उम्मीद की शम्मा जलाये रखता है|* मलाकी 4:2 में लिखा है—तुम्हारे लिए , जो मेरे नाम का भय मानते हो, धर्म का सूर्य उदय होगा , और उसकी किरणों के द्वारा , तुम चंगे हो जाओगे , और तुम पाले हुए बछड़ों के समान , कूदोगे और फांदोगे| *परमेश्वर के वचन में , निश्चितता है| इसमें हां ही हां है ; इसमें नहीं के लिए कोई जगह नहीं है| सूर्य उदय होगा, तो होगा ; कोई ताक़त उसे रोक नहीं सकती|* 
आमीन
प्रभु ही अन्धकार में ज्योती है
रैव्ह राजेश गिरधर
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