परमेश्वर हमेशा धर्मी को बचाता है और उसकी एक एक वस्तु की भी रक्षा करता है मगर इसके लिये व्यक्ति को परमेश्वर के बताए हुए रास्ते पर चलना पडता है परमेश्वर व्यक्ति के जीवन में आशीष और शाप दोनों देता है यह व्यक्ति के ऊपर निर्भर करता है वो किस को चुनता है।
अगर परमेश्वर की आज्ञाओं को हम नहीं मानते तब व्यक्ति के जीवन में शाप काम करने लगता है।जब व्यक्ति परमेश्वर की आज्ञाओं को मानता है तब उसके जीवन में आशीष काम करने लगती है , व्यवस्था 11 ; 26 कहता है सुनों मैं आज के दिन तुम्हारे आगे आशीष और शाप दोनो रख देता हूँ ; 27 अर्थात यदि तुम अपने परमेश्वर यहोवा की इन आज्ञाओं को जो मैं आज तुम्हें सुनाता हूँ, मानों तो तुम पर आशीष होगी परमेश्वर का भय अपने जीवन मे रखकर चलना उसकी आज्ञाओं को मानना ही हमारे जीवन की सच्चाई है तब ही कोई वस्तु हमारी नहीं खोएगी और हम आशीष मे चल सकेंगे।परमेश्वर हमारी हर वस्तु का ध्यान रखता और उन मे से कुछ भी नहीं खोता है ।
परमेश्वर की आज्ञानुसार चलना भय मे चलना हमें आशीषित करता तथा यह वचन तब हमारे जीवन में पूरा होता है ।
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह, राजेश गिरधर
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