PRAISE THE LORD
🙏Good Morning 🙏
 👉 *परीक्षाओं से सीख* 💐
 *👉“धन्य है वह मनुष्य, जो परीक्षा में स्थिर रहता है”* (याकू 1:12)
परीक्षा में पड़ना पाप नहीं है परन्तु परीक्षा में अपने को सौंप देना पाप है. साधारण तौर पर हम अपनी असफलता के लिए किसी दूसरे व्यक्ति या किसी वस्तु को दोष देते हैं. आदम और मसीह ने परीक्षा में जो व्यवहार किया, वह हमें व्यावहारिक शिक्षा देता है. 
❇️ कितनी परीक्षाएं
यीशु एक के बाद एक आने वाली परीक्षाओं पर जयवन्त हुआ यद्यपि मत्ती के सुसमाचार अध्याय 4 में केवल तीन परीक्षाओं का वर्णन किया है, लेकिन हमें निश्चय है कि शैतान कुछ समय के लिए उसके पास से एक उपयुक्ति पाने तक के लिए चला गया (लूका 4:13). एक विशेष परीक्षा तभी रुकती या कमज़ोर होती है जब हम हार मान बैठते हैं. परन्तु यीशु ने कभी हार नहीं मानी. शैतान अपनी युक्तियों और चाल में बदलाव करता और अपने क्रोध को भड़काता था. इसलिए बाइबिल कहती है वह हमारी तरह “हर” पहलू पर परखा गया. यीशु के सामने परीक्षाएं निरन्तर आती रही, और वह जयवन्त हुआ, वहीं आदम प्रथम और एकलौती परीक्षा से हार गया.
आम तौर पर लोगों की शिकायत होती है कि “लगातार आने वाली परीक्षाओं का सामना कैसे कर सकते हैं?” यीशु के अलावा इसका उत्तर केवल अय्यूब है. सबीनी लोगों ने उसके सेवकों का वध किया, यह खबर उस तक एक संदेशवाहक द्वारा पहुंची. वह “अभी बात कर ही रहा था” उसी समय खबर मिली कि उसकी भेड़ें परमेश्वर द्वारा भेजी गई अग्नि से नाश हो गयी. वह “अभी बोल ही रहा था” कि अगला यह समाचार लाया कि उसके ऊंटो को कसदी लोग ले गये. “जब वह कह ही रहा था” कि दूसरा, दीवार ढहने से उसके बच्चों की मृत्यु का समाचार लाया. क्या ऐसी कठोर अग्नि परीक्षा हम में से किसी पर भी इतने छोटे से अन्तराल में एक के बाद एक और भयानक रूप से हुई है? “इन सारी बातों में अय्यूब ने कोई भी पाप न किया!” (अय्यूब 1:13-22). परीक्षा की कोई भी मात्रा, पाप की किसी सीमा या मात्रा को न्यायोचित नहीं ठहराती! 
❇️ हम कहां हैं?
पवित्र आत्मा ने जंगल में यीशु की ठीक वैसे ही अगुवाई की जैसे परमेश्वर ने आदम को वाटिका में रखा (मत्ती 4:1; उत्प 2:15). यीशु प्रबल हुआ पर आदम पराजित हुआ. हम स्थान की परिस्थितियों को या प्रकृति को अपनी असफलता के लिए दोष नहीं दे सकते.
यद्यपि यूसुफ को उसके भाइयों ने मिस्र देश वासी को बेच दिया, वह “परमेश्वर ही” था जिसने उसे वहाँ भेजा था. मिस्र देश अपनी पतित नैतिकता के लिए जाना जाता था (उत्प 45:4,5). मिस्री लोग किसी की पत्नी को पाने के लिए उसकी हत्या करने में भी संकोच नहीं करते थे (उत्प 12:12). नैतिकता का पतन हर स्तर पर था. पोतीपर फिरौन के भवन में एक अधिकारी था और उसकी पत्नी यूसुफ पर डोरे डालती थी जो उस घर का भण्डारी था (उत्प 39:5-7 ). ऐसी पतित परिस्थितियों में भी यूसुफ ने पाप को ‘न’ कहा! मैंने बहुत से मसीही लोगों को ऐसा कहते सुना है कि ” यदि मेरी किसी मसीही संस्था में नौकरी लग जाती तो मैं…” प्रियजनों, आप चाहे जिस भी स्थान पर है यदि परमेश्वर ने आपको वहाँ नियुक्त किया है तो फिर आपके पास अपनी असफलता का बहाना नहीं रह जाता है।
       परमेश्वर ने हमें जहां कहीं भी रखा है हमें वही पर विश्वासयोग्य बन कर रहना है, क्योंकि  वचन कहता है कि जब हम थोड़े से थोड़े में विश्वासयोग्य रहेंगे तो परमेश्वर हमें बड़ी वस्तुओं का अधिकारी बनाएंगे।
Amen 🙏
Hv a blessed day 🙌✝️
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