शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आँख होता है। जिससे व्यक्ति दूनियाँ की अच्छी और बुरी दोनों प्रकार की वस्तुओं को देखता है जिन वस्तुओं को उसे देखने का अधिकार नहीं वह भी वह देखता है , जिनको देखने भर से मनुष्य का सारा शरीर अन्धेरे मे जा सकता है वह देखने मे आनन्द लेता है ।
आज सब कुछ आसानी से एक अंगूठे की दूरी पर मिल जाता है जवान तो जवान बूढे ,बच्चे भी उन सब को इन्टरनेट पर देखने से परहेज नही करते मजा ले लेकर देखते रहते हैं ।
जिसका परिणाम उनके शरीर मे आप देख सकते हैं उनके शरीर में सबसे पहले आँखे खराब होने लगती है । मन में काम वासना जन्म ले लेती है उस काम वासना को पूरा करने के लिये व्यक्ति गलत रास्तों पर चल पडता है जिसका भुगतान उसके पूरे शरीर को करना पढता है शरीर इन कामों को करने के बाद अशुद्ध हो जाता है बाइबिल कहती है तुम्हारा शरीर एक मन्दिर है जब शरीर मन्दिर है तो यह खराब क्यों हो जाता है इसी कारण जब आँखे देखती है तो उसे पाने का यत्न करती है जो बहुत बार पाप को जन्म देता है पाप करने के बाद उसका भुगतान भी शरीर को करना पढता है क्योंकि पाप का परिणाम मृत्यु है जिसका अनदाजा मनुष्य को नहीं हो पाता और वह पाप करने मे आनन्दित होता है बहुत बार आत्मा व्यक्ति को समझांने की कौशिश भी करता है पर शरीर की अभिलाषा उस आवाज को नहीं सुन पाती या कहें सुनना ही नहीं चाहती जिसका परिणाम घोर अन्धकार ही होता है क्योंकि लिखा है
मती 6 : 23 – परन्तु यदि तेरी आँख बुरी हो, तो तेरा सारा शरीर भी अन्धियारा होगा ; इस कारण वह उजियाला जो तुझ में है यदि अन्धकार हो तो वह अन्धकार कैसा बडा होगा ।
अपने शरीर को स्वस्थ रखना है तो अपनी आँखों को गन्दगी देखने से, रोकना होगा ताकि वो गन्दगी आपके शरीर को खराब न करे तथा आपका शरीर स्वस्थ रहे नही तो अस्वस्थ शरीर को एक बौझ की तरह सारी उम्र ढोना पढेगा खुद सम्भलो औरों को भी चैतावनी दो ताकि वो भी सम्भलें
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर


