विश्वास का रिश्ता, ख़ुदा से है, और आत्मविश्वास का संबंध, आपसे है| विश्वासी में अगर आत्मविश्वास ना हो, तो शैतानी ताकतों से जंग नामुमकिन है| ये दोनों एक दूसरे के पूरक हैं और दोनों एक दूसरे के बिना अधूरे हैं । यीशु पर विश्वास कर, पतरस ने पानी पर चलना शुरू कर दिया था, मगर आंधी को देख कर, उसका आत्मविश्वास टूट गया| अगर पतरस पानी पर कुछ और समय तक चलते रहता, तो उसका आत्मविश्वास और मज़बूत हो जाता| *समस्याओं से जूझने के लिए, आत्मविश्वास निहायत ज़रूरी है|*समस्याएं ; बीमारियां ; परेशानियां, कैसी भी क्यों ना हों, प्रार्थना के लिए विश्वास, और लड़ने के लिए आत्मविश्वास चाहिए| इब्रानियों 10:39 में लिखा है —हम हटने वाले नहीं , कि नाश हो जाएं ; पर विश्वास करने वाले हैं, कि प्राणों को बचाएं| ये माना की जंग ख़ुदा की है, मगर जो मैदान-ए- जंग से भाग जाता है, उसकी ओर से ख़ुदा नहीं लड़ता| जब आपके अन्दर से आवाज़ आती है, मैं कर सकता हूं ; तो दुआओं में असर पैदा हो जाता है| समस्याओं के सामने खड़े रहिये, ख़ुदा आपके साथ है| 
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर
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