परमेश्वर हमारे मनों को जानता है हमारे मन में क्या क्या चलता रहता है।
लोगों को दिखाने को तो हम बहुत ही धर्मी बनते हैं और धर्म के काम भी करते ताकि लोगों की नजर में धर्मी नजर आएँ ? पर बाद में हम अपनी उन सारी अभिलाषाओं को भी पूरा करने की कौशिश करते जो हमारे शरीर को चाहिए होती है।
इसे कहते हैं दूसरों को व परमेश्वर को धोखा देना है  सबसे बडी बात अपने आप को धोखा देना है , लोगों के सामने तो अपनी अच्छाई दिखा दी पर बाद मे अपना असली रुप दिखा दिया ; इस से परमेश्वर प्रसन्न नही होता हाँ लोग जरूर प्रसन्न हो जाते और कहते व कितना धर्मी व्यक्ति है पर परमेश्वर की नजर मे नहीं ? 
परमेश्वर की नजर मे सिर्फ वही धर्मी ठहरते हैं जो उसके भय मे चलते हुए पाप से दूरी बनाकर चलते हुए अपना जीवन बिताते हैं हर काम को करने से पहले सोचते हैं क्या यह काम परमेश्वर के भय में है यह नहीं, अगर नही तो उस काम से दूर हो जाते हैं,इसी तरह के लोगों पर परमेश्वर अपने भेदों को खोलता है ।
गहरी रहस्य की बातों को उजागर करता है ,पर यह बात सबको समझ नहीं आती ज्यादातर लोग अपनी समझ का सहारा लेते हुए फेल हो जाते हैं पर जो परमेश्वर से डरते उनके वंश को परमेश्वर पृथ्वी का अधिकारी करता तथा अपनी वाचा भी उन पर प्रगट करता है,जैसे राजा दाऊद जो एक बडा उदाहरण है बाईबल में आप भी उसकी वाचा मे शामिल हो सकते हो बस उसका भय मानों पाप से दूरी बनाओ रखो। 
आमीन
प्रभु आपको और आपके परिवार को आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर
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