समस्याएं और दुःख, हक़ीकत में आपकी समस्या नहीं हैं| शैतान नाना प्रकार के हथकंडे अपना कर, आपका ध्यान भटकाना चाहता है| ख़ुदा आपके ध्यान और ज़िन्दगी का केंद्र है, और होना भी चाहिए| परमेश्वर पर से ध्यान भटकना ही, आपकी सबसे बड़ी समस्या है| दुखों में ख़ुदा को याद करना, बत्ती गुल हो जाने पर, मोमबत्ती तलाशने जैसा है| या दुखों और समस्याओं में, आप ख़ुद ही अपने ध्यान का केंद्र बन जाते हैं| हर वक़्त आप, ख़ुद के बारे सोचते रहते हैं ; और परमेश्वर आपके ध्यान का  केंद्र नहीं रहता| सुख हों या दुःख, आपका ध्यान ख़ुदा पर केन्द्रित रहना चाहिए| ये बिल्कुल माँ और बच्चे के रिश्ते जैसा होता है| हर हाल में माँ के ध्यान का केंद्र, बच्चा ही होता है| भजन 34:8 में लिखा है —जिन्होंने उसकी ओर दृष्टि की, उन्होंने रौशनी पाई ; और उनका मुंह कभी, काला ना होने पाया| जो ख़ुदा की ओर ताकते रहते हैं, उन्हें कभी शर्मिंदा नहीं होना पड़ा| समस्याएं आएंगी ; विरोध होंगे ; लोग आलोचना करेंगे, मगर वो आपका सींग, हमेशा ऊंचा रखेगा| जब वो आपकी नज़र में होता है, तब ही आप उसकी नज़र में हैं|
आमीन
प्रभु की नजर हमेशां हमारे ऊपर रहती है
रैव्ह. राजेश गिरधर
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