जीवन जितना आसान लोग समझते हैं उतना आसान नहीं है , हर समय हमें अपने आप से लडते रहना पडता है जिस संसार मे हम निवास करते हैं वो संसार भौतिक वस्तुओं से भरा पडा है।
मन चाहता है यह भी ले लूँ, वह भी ले लूँ, मगर आत्मा कहती है यह सब निष्फल है किसी का भी वो महत्व नहीं जो हमें परमेश्वर से मिला सके, हाँ परमेश्वर से दूर जरूर कर सकती है , शरीर हमेशा आत्मा के विरोध मे काम करता है और आत्मा शरीर के, शरीर सब अपनी अमिलाषाओं को पूरा करना चाहता मगर आत्मा इसे करने से मना करती है।
इसी कश्मकश मे जीवन चलता रहता है कभी आत्मा जीत जाती और कभी शरीर, पर जब जब शरीर जीतता है तब तब आत्मा शौकित होती है वो जानती है शरीर के काम उसे स्वर्ग नहीं जाने देंगे और आत्मा तो परमेश्वर के पास लौट जाना चाहती है इसीलिये पौलुस कहता है मै अपने शरीर को हमेशा मारता कूटता हूं, कहीं वो शरीर के अनुसार जीवन न बिताने लगे शरीर को मारने कूटने का मतलब होता है शरीर को हर वो काम करने से रोकना जिसे करके वो आनन्दित होना चाहता है शरीर का आनंद आत्मा की हार है और आत्मा की हार व्यक्ति की हार है और व्यक्ति ही हार गया तो वो यीशु मसीह के साथ स्वर्ग नहीं जा सकता तो करना क्या है ?.
अपने आप को प्रभु का जन जानकर हर उस शारीरिक काम से दूर करना है जो हमारे राह मे स्वर्ग जाने मे रोडा है जब हम अपनी देह को मारेंगे कूटेगे तभी हम दूसरों को भी वैसा ही सिखा सकेंगे नहीं तो वही हाल होगा दूसरों से कहेंगे शराब मत पीयो खुद शाम को ठेके की लाईन मे लगे होंगे ।
दूसरों से कहेंगे व्यभिचार मत करो खुद व्यभिचारी का जीवन बिताते होंगे तब तो सारा मामला ही गलत हो जाएगा सब मसीही लोगों को बडी सावधानी से अपने जीवन को जीते हुए उस दौड को पूरा करके वो मुकुट लेना है जो हमारे लिये स्वर्ग मे परमेश्वर ने रखा है जिसे पहनकर हम प्रभु के साथ खडे रह सकते हैं नहीं तो जीवन यूँ ही निकल जाएगा मसीह में आने के बाद भी हार का सामना करना पडेगा जो खतरनाक होगा अपने को सम्भालो जैसा प्रचार करते हो वैसा जीवन जीना भी शुरू करो वरना सब व्यर्थ है जैसा सभोपदेशक की पुस्तक कहती सब कुछ व्यर्थ है इस पृथ्वी पर जो बोलो वैसा जीयो भी ।
आमीन
प्रभु की सुन कर वैसा ही करें
रैव्ह राजेश गिरधर

