लोगों के पास ज्ञान है , दौलत है , नाम है , शौहरत है ; मगर ज़िन्दगी में अन्धकार है| असंतुष्ट जीवन , पति-पत्नी के टूटते रिश्ते , बच्चों का बिगड़ना , विवाहोत्तर संबंध , ऐसे और ना जाने कितने ही अंधकार घर और परिवार में समाये हुए हैं| इंसान नैतिक पतन की कगार पर है| नशा व्यभिचार , फ़ैशन हो गया है| संसार के साथ चलने का मतलब , अपने ईमान से समझौता करना नहीं है| *इफ़िसियों 6:12 में शैतान को अंधकार का हाकिम कहा गया है| कितनों के पास सबकुछ है , मगर ज़िन्दगी में पाप का अन्धकार है| कितने ही निराशा के अन्धकार में डूबे हैं| यरूशलेम में रौशनी का पर्व मनाया जाता था , मगर धार्मिक अंधकार का साम्राज्य था| आज भी हम , धार्मिक अन्धकार से अछूते नहीं हैं| यशायाह 60:2 में लिखा है—पृथ्वी पर तो अंधियारा और राज्य-राज्य के लोगों पर , घोर अंधकार छाया हुआ है ; परन्तु तेरे ऊपर , यहोवा उदय होगा, और उसका तेज़ तुझ पर प्रगट होगा|
आमीन
प्रभु का प्रकाश आप पर प्रगट हो
रैव्ह. राजेश गिरधर

