ज़िन्दगी दरिया की तरह है , जो लगातार बहता रहता है; जब तक की सागर से ना मिल जाये| ज़िन्दगी समय के समान है ; जो कहीं रुकता नहीं| हर शाम, रात का पैगाम लेकर आती है ; और हर रात, सुबह का सन्देश लेकर| सुख़ और दुःख धूप छाँव की तरह आते जाते रहते हैं ; कुछ भी स्थाई नहीं है| सुख़ के दिन कम लगते हैं , और दुःख के कम दिन भी बहुत लम्बे लगते हैं| इसका कारण हमारी मानसिकता है| हम बहुत बार अतीत से छुटकारा पाने में असफ़ल रहते हैं| असफ़लता और निराशा , हमारे दिमाग़ से जोंक की तरह चिपक जाती हैं| पौलूस कहता है—मैं पीछे की बातों को भूल कर , आगे की ओर बढ़ता जाता हूं| यही विचार ही जीने की कला है| हमारा अतीत , लूत की पत्नी की तरह हमें पीछे की ओर खींचता है| 3000 साल के इतिहास में यरूशलेम 40 बार उजाड़ा गया ; लेकिन जितनी बार बर्बाद हुआ , उतनी ही बार बसाया गया| घटनाओं से सबक सीखना भी अकलमंदी है|| *इब्रानियों 12:11 में लिखा है—वर्त्तमान में हर प्रकार की ताड़ना , आनंद की नहीं पर शोक ही की बात दिखाई देती है ; तौभी जो उसको सहते सहते पक्के हो गए हैं , पीछे उन्हें चैन के साथ धर्म का प्रतिफल मिलता है|
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर

