जब भी कोई व्यक्ति प्रभु को ग्रहण करके बपतिस्मा लेता है तब वो अपने हर उस पुराने पाप को , पुराने जीवन को , पुराने घिसेपिटे रिवाजों को तजकर प्रभु के साथ हो लेता है जिससे उसे अपने पुराने किये गये गुनाहों से माफी मिलती और वो एक नये जीवन में प्रवेश करता है जो कि उसे सब प्रकार के बन्धनों से मुक्ति देता है यहीं से शुरुआत होती है मसीही जीवन को जीने की पर बहुत से लोग अपने आप का इन्कार नहीं कर पाते अपने पुराने जीवन को भी जीते हैं और मसीही जीवन को भी तब उनकी जिन्दगी में जो काम परमेश्वर करना चाहता है नहीं कर पाता तब उनकी जिन्दगी पूरी तरह नहीं बदलती जो कि अपने आप को धोखा देने जैसा है जो मसीह में नहीं वो मेरा नहीं क्योंकि वो उन सारे कामों में लिप्त है जो व्यक्ति को पाप की ओर ले जाता है पाप की मजदूरी तो मृत्यु है जैसा लिखा है यही वजह थी यीशु मसीह ने अपने सब पुराने रिशतों का इन्कार किया वो जानता था पुराने बन्धन उसे अपनी ओर खींचेगें जो उसे इस नये जीवन को जीने में बाधा उत्पन्न करेंगे , इसी कारण उसने उन रिशतों का इन्कार किया ताकि हमें वो सिखा सके हम उनके साथ हैं जो परमेश्वर के वचन पर चलते हो , अगर हमारे रिशतेदार भी प्रभु के वचन पर चलतें हो तब वो भी आपके साथ स्वर्ग जा पाएंगे नहीं तो वो तुम्हें भी अपने साथ उस संसार में ले जाएंगे जहाँ सिर्फ अन्धकार तथा रोना पीटना है जहाँ की आग कभी बुझती नहीं जहाँ का कीडा कभी मरता नहीं यीशु मसीह हमें बचाना चाहता है वो सब कुछ करके हमें दिखा चुका जो हमें करना है , उसने वो सब सहा जो हम पर आ सकता है एक मिसाल उसने हमें दिखाई और एक रास्ता हमारे लिए तैयार किया हमारे चलने के लिये अब यह हमारे ऊपर निर्भर करता है हम उस रास्ते पर इमानदार हैं या नहीं ? 
आमीन
प्रभु आपको बहुत बहुत आशीष दे
आपकी सेवा में प्रभु का दास
रैव्ह राजेश गिरधर
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