बाईबल कहती है:- जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पडो , तो इसको पूरे आनन्द की बात समझो ।
यह बात सब पर फिट बैठती है फर्क इतना है एक विश्वासी इसे अपने जीवन में प्रभु की कृपा मानता है  , और अविश्वासी इसे दुख  ,  एक विश्वासी को भरोसा  होता है परमेश्वर उसे बचाएगा ,  वहीं अविश्वासी यह सोचता है अब मैं क्या करुँ ? मेरा क्या होगा  ?
अगर हम 2020 में पीछे मुडकर देखते  तो हम कांप उठते हैं  , वो ऐसा वक्त था जब सब कुछ ठहर गया , सब जहाँ थे वहीं रुक गये  , 
जो घर में था वही ठहर गया जो गाँव में था वही ठहर गया चारो तरफ सिर्फ रोना , बिलखना ही दिखाई देता था , किसी के पास काम नहीं तो किसी के पास खाना नहीं पैसा होते हुए भी उसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे,चारों
एक ऐसा खोफ  , जैसा राजा फिरोन के समय देखने को मिला जब परमेश्वर ने मिस्र दस महामारी को डाला था  । हर घर से रोने की आवाज आती,बस सब रो रहे थे  , ऐसा ही परमेश्वर ने  फिर दिखा दिया  ; कोई किसी के पास अगर जाना चाहे तो भी नहीं जाता था ।  यह खोफ दौबारा देखने को मिला , जैसे लगता था परमेश्वर सब कुछ खत्म करने को है ।
तब भी विश्वासी लोग परमेश्वर से प्रार्थना कर रहे थे  ; वो उनकी सच्ची प्रार्थना का जवाब भी दे रहा था  , पर जो विश्वासी नहीं थे वो घबराए हुए थे  , अब क्या होगा  ? मगर विश्वासी अपने विश्वास के कारण बचा हुआ था । लिखा  है परमेश्वर का जन विश्वास से ही जीवित रहेगा और इस महामारी में जिसने सच्चाई से परमेश्वर पर विश्वास किया  , प्रार्थना की ,  वो बचाया गया , उसके घर में किसी भी भली वस्तु की घटी होने न पाई । यह सब हमें मजबूत करने के लिये हुआ , हमारे विश्वास को और मजबूत करने के लिये हुआ , ताकि और आनेवाले समय में हम उन घटनाओं को झेल सकें जो आनेवाली हैं ।
 बस अपने विश्वास को मजबूती से थामें रहो परिक्षाएं तो आएँगी ही मगर परमेश्वर उन से बाहर निकलने का रास्ता भी दिखाएगा और हमें आनन्द के महासागर में लेकर जाएगा जहाँ न तो आसूं होंगे और न ही रोना पीटना तो ठहरे रहना परमेश्वर सब बातों में बचानेवाला है ।
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर

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