भय आपका सबसे बड़ा दुश्मन है| आप ही उससे लड़ कर जीत सकते हैं| इस युद्ध में कोई दूसरा आपकी सहायता नहीं कर सकता| डर आपके दिल ओ दिमाग़ में है , जिस पर  केवल आपका अधिकार है| जो दुश्मन बाहर हो उससे लड़ना आसान है , अन्दर बैठे शत्रु से जीतना , अगर नामुमकिन नहीं तो मुश्किल ज़रूर है| पतरस ने यीशु के साथ जीने और मरने का दावा किया ; मगर  हकीक़त कुछ और थी| अपने अन्दर छुपे हुए डर को , पतरस भी नहीं पहचान पाया| मगर ये एक ऐसा दुश्मन था , जिसे तलवार से नहीं हराया जा सकता डर और वो भी सलीबी मौत का डर , शायद वो पतरस के कद से भी कहीं बड़ा था| पतरस उस डर के सामने बौना साबित हुआ| क्या आपकी ज़िन्दगी में भी , कोई डर है जो आपको आगे बढ़ने से रोक रहा है| भजन 49:5 में लिखा है — विपत्ति के दिनों में जब मैं अपने अड़ंगा मारने वालों की बुराई से घिरुं ; तब मैं क्यों डरूं? समस्याओं के काले साये हों , दुखों की बारिश हो ; उम्मीद के चिराग़ बुझने को हों , तब भी दिल से एक आवाज़ उभरनी चाहिए , ख़ुदा मेरे साथ है,मैं क्यों डरूं?
आमीन
प्रभु ही हमे जयवन्त जीवन देता है
रैव्ह राजेश गिरधर
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