तू भूमि की सुधि लेकर उसको सींचता है , तू उसको बहुत फलदायक करता है ; परमेश्वर की नदी जल से भरी रहती है ; तू पृथ्वी को तैयार करके मनुष्यों के लिये अन्न को तैयार करता है ।
यह है उस खाने की सच्चाई जो हर रोज तीनों समय हमारी मेज पर होता है ; जिसे बहुत से लोग खाते तो कंम हैं पर बर्बाद ज्यादा करते हैं ? यह उन्हेँ मालूम नहीं होता उस खाने को उगाने के लिये परमेश्वर ने अपने स्वर्ग से अपने पवित्र जल को बरसाया और तब जाकर जमीन तैयार हुई और फिर जाकर किसान ने उसमें हल चलाकर धरती का सीना चीर कर अन्न उगाया तब जाकर वो अन्न हमारी मेज तक पहुँचा और उसे खाया कम बर्बाद ज्यादा किया ? 
इस अन्न को पैदा करने की खातिर परमेश्वर ने कितनी मेहनत की किसान ने अपना खून पसीना बहाया यह हमें पता नहीं लगता हम तो बस दुकान पर जाकर सामान खरीद लाते पर उस सामान को बनानेवाले की मेहनत को भूल जाते और कहते फिरते हमने इसे खरीदा है किसी को भी उसके पीछे की मेहनत नजर नहीं आती परमेश्वर ने जो रचना की है वो नदियों के जल को भाप बनाकर बादलों पर रखता है और समय समय पर मनुष्यों के लिए मेह बरसाता है , तब जाकर धरती की प्यास बुझती है परमेश्वर कितना महान है उसने हमें यूँ ही नहीं छोडा उसने समय समय पर हमारे लिये हर फल का , फूल का इन्तजाम किया ताकि मनुष्य को किसी भी तरह की तकलीफ न हो उसने हमारी हर छोटी से छोटी जरूरत का ध्यान रखा ताकि हमें किसी भी तरह की कठिनाई का सामना न करना पडे पर मनुष्य ने अपने लाभ की खातिर सब कुछ बिगाड दिया मगर परमेश्वर फिर भी हमारा ध्यान रखता है कितना भला है हमारा परमेश्वर । 
परमेश्वर का धन्यवाद करो , क्योंकि वो भला है , उसकी करुँणा सदा की है ।
आमीन
प्रभु ही सदा सर्वदा धन्यवाद के योग्य है
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