बाईबल में साफ साफ लिखा हैं कि हमें अपने पापों को मानना कितना जरूरी है जब तक हम अपने पापों का अंगिकार नही करते तब तक हम परमेश्वर के समीप नहीं जा सकते परमेश्वर पवित्र है वो अपवित्रताई में नहीं रह सकता, बाईबलल में यह भी लिखा हुआ है ,अपने पापों को मानना उसे छोडना , छोडकर परमेश्वर के पीछे हो लेना यह वचन बताता है । हम अगर अपने पापों को मानकर यीशु के समीप आते हैं तब हमारी प्रार्थनाओं का जवाब हमारे पास आने लगता है अगर हम दौगला चरित्र अपनाते फिर सोचते कि परमेश्वर हमारी प्रार्थना को सुनेगा तो यह हमारा वहम है ।
जब हम अपने अपराध परमेश्वर के सामने रखते तब वो हमें माफ करता है और अपना पुत्र व पुत्री होने का अवसर देता है अब यह हमारे ऊपर निर्भर करता है हम क्या चाहते हैं पापों का अंगिकार करके परमेश्वर के साथ चलना या अपने पापों को छुपाकर खुद को धोखा देना फैसला आपका है ।
आमीन📕
प्रभु आपको और आपके परिवार को आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर

