क्या हम अपने पडोसियों से रिशते को सही निभाते हैं ? यह एक सवाल है, बड़े बड़े शहरों में है आज भी कई लोग अपने पडोसियों को पहचानते भी नहीं कि हमारे पडोस में कौन रहता है
वह इतने ज्यादा हम अपने में व्यस्त रहते हैं कि उन्हें मालूम भी नहीं कि हमारे पड़ोस में कौन रहता है , पर यह बात गावों में और छोटे शहरों में लागू नहीं होती वो लोग अपने पडोसियों को जानते हैं और उनसे सही व्यवहार भी करते पाए जाते हैं । बहुत बार हम अपने अहंकार मे दूसरे को तुच्छ समझने लगते और घमण्डी हो जाते हैं; जो कि हमारे अहंकार को दर्शाता है जिसकी वजह से लोग हमसे दूर होते जाते हैं । हम धन तो कमा लेते पर लोगो के प्यार को नही कमा पाते , तब हमारे पास सब कुछ होते हुए भी अकेले रह जाते हैं ; यह बात हर उस व्यक्ति को अकेला कर देती है जो अपने को ऊंचा और दूसरे को तुच्छ समझता है ।
अगर हम पचास साल पीछें जाएँ तो हम पाएँगे ऐसा नहीं था हर गली मोहल्ले के लोग एक दूसरे को जानते थे ; एक दूसरे के सुख दुख में खडे रहते थे , एक दूसरे की जरुरत़ो का ध्यान रखते थे, किसी के घर किसी चीज की कमी हो तो दूसरे के घर से वो वस्तु आ जाती थी , भाई चारा कायम था ।
पर आज ऐसा नहीं है पडोसी भूखा रहता है पर हम उसका ख्याल ही नही रखते ; दूर के दोस्तों को पार्टी में बुलाते पर पडोसियों को छोड देते हैं, यह हमारे अहंकार को बताता है , जबकि बाइबिल हमें अपने पडोसी से प्रेम करना सिखाती है जिसका हमें पालन करना चाहिए अपने साथ साथ अपने पडोसी का ख्याल भी रखना चाहिए अगर वो कुछ मांगे वो हमारे पास हो तो मना नही करना चाहिए यही बाइबिल कि और यीश मसीह की शिक्षा है । जिसका पालन करना हमारा धर्म नहीं कर्तव्य भी है ।
आमीन
प्रभु आप सबको आशीष दे

