जो अपने मुँह की चौकसी करता है , वह अपने प्राण की रक्षा करता है ; परन्तु जो गाल बजाता है उसका विनाश हो जाता है । अकसर देखने में आता है कुछ लोग बहुत ज्यादा बौलते हैं जब वो बौलना शुरू करते हैं तब उन्हे इस बात का जरा सा भी अहसास नहीं होता उनके शब्दों का क्या अर्थ है जो वह बौल रहे हैं उस बात को सही होना चाहिए न कि गलत ? 
बाइबिल कहती है बुद्बिमानी से बोलो नीति  11 ; 14 जहाँ बुद्बि की युक्ति नहीं , वहाँ प्रजा विपत्ति में पडती है ; परन्तु सम्मति देनेवालों की बहुतायत के कारण बचाव होता है । अगर बौलना है तो सही बात बोलने के लिये सही सम्मति देने के लिये अपना मुँह खोलो बैवजह , बैमतलब बौलकर न तो अपनी उर्जा समाप्त करो और न ही दूसरों के सर दर्द का कारण बनों ज्यादा बोलनेवाले अकसर उन बातों को भी बौल देते हैं जो उन्हें छुपा कर रखनी होती है सब बातों का खुलासा सबके सामने करने से वो खुद को तथा दूसरों को भी संकट में डाल देते हैं नीति 12 ; 23 – चतुर मनुष्य ज्ञान को प्रकट नहीं करता है , परन्तु मूढ अपने मन की मूढता ऊँचे शब्द से प्रचार करता है जब व्यक्ति ज्यादा बौलने लगता है तब वो अपने अन्दर की मूढता को भी प्रकट करने से भी परहेज नहीं करता जो उसकी हानि का कारण भी हो सकता है इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वो कम बोले सुने ज्यादा ताकि लोग उसे भी बुद्बिमान समझें ।
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
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