बाइबिल कहती है कि अन्धकार से उजाले में आना ही उद्धार अर्थात मुक्ति, मोक्ष, छुटकारा, आजादी, deliverance है। मुक्त उसे किया जाता है जो बन्धन में है। मनुष्य दो दुनिया से मिल कर बना है, भौतिक और आत्मिक (material & immaterial world) भौतिक दुनिया से आता है शरीर, जिसे माँ बाप जन्माते है और आत्मिक दुनिया से आती है आत्मा। जब दोनों दुनिया का संगम होता है तब मनुष्य का जन्म होता है। आज संसार भौतिक (शारीरिक) रूप से बंधन में इसलिए है क्योंकि वह आत्मिक रूप से अन्धकार में है। 
लेकिन क्या है यह बन्धन? जीवन मे शान्ति और आनन्द का न होना ही बन्धन है। नोकरी नहीं है तो दुखी। जिसके पास है वो भी दुखी। boy friend/girl friend नहीं है तो दुखी, है तो दुखी। शादी नहीं हो रही है तो दुखी, हो जाए तो दुखी। बच्चे नहीं होते तो दुखी, हों तो दुखी। ज्यादा पैसा है, तो दुखी, नहीं है तो दुखी, भूख नहीं लगती तो दुखी, ज्यादा खा लो तो दुखी, भूख है पर रोटी नहीं तो दुखी। मोटा भी दुखी तो पतला भी। गोरा दुखी, तो काला भी। घरेलू लड़ाई झगड़े, तलाक होना, पुलिस, डॉक्टर, वकील, तांत्रिक को पैसा देना आदि। क्या परमेश्वर ने इन दुखों को भोगने के लिए इंसान को बनाया था? इन सब दुखों का कारण इंसान का आत्मिक अन्धापन है जो होता है सच्चे और जीवित परमेश्वर से दूर होकर अविश्वास, अल्पविश्वास, अंधविश्वास, धर्म-कर्म में पड़ कर। बाइबिल कहती है संसार मे जन्म लेने वाले हर व्यक्ति को मुक्ति कि जरूरत है। यीशु मसीह ने कहा जीवन कि रोटी मैं हूँ जो मेरे पास आएगा वो कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा वो कभी प्यासा न होगा।
आमीन
प्रभु ही हमारा उध्दार कर्ता है
रैव्ह राजेश गिरधर
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