यदि आप किसी से प्रेम करते हुए किसी और से प्रेम नहीं करते तो इसका अर्थ है कि आप प्रेम नहीं करते”
Love means missing someone
एक बात कहीं पढ़ी थी “आप यदि किसी से प्रेम करते हुए किसी और से प्रेम नहीं करते तो इसका अर्थ है कि आप प्रेम नहीं करते”। दूसरी बात सुधाकर से सुनी “Love means missing somone”। प्रेम, मतलब किसी को याद करना…
सुधाकर मिश्रा के लिए तो प्रेम का यही एक मतलब था। जैसे उसी फ़िल्म की सबसे छोटी बच्ची के लिए प्यार मतलब दोस्ती था। लेकिन अपनी सबसे पहली प्रेमिका को धोखा देने के बाद भी यदि मैं प्रेम पर लिखने बैठ जाऊं तो कितनी लज्ज़ा की बात है। जब भी कोई प्रेम पर लिखी मेरी किसी पंक्ति पर आह भरता है तो लगता है मैं उनसब का अपराधी हूँ। सच कहूं तो महानगरों में प्रेम, मेरे समय का सबसे घिसा–पिटा शब्द बन चुका है इसका एक कारण इसलिए भी कि इसे सही से लिखे जाने तक के लिए भी सच्चे लोग न मिल सके। लेकिन मेरे जैसों के द्वारा लिखे जाने से प्रेम अप्रसांगिक नहीं हो जाता…
प्रेम बहुतों के लिए अब भी एक सुंदर अहसास है। एक पुरुष प्रेम में ठगता है तो दूसरा पुरुष उसके लिए मर तक भी जाता है। सुधाकर वही तो कर रहा था। अपनी बीबी के मरने के बाद उसे याद करके। उससे पूछा गया कि प्रेम मतलब क्या??? तो मूंह से यही निकला “प्रेम???.. प्रेम मतलब किसी को याद करना”.
सुधाकर ने धन्वा की उन पंक्तियों को खारिज किया जिसमें वे कहते हैं “तुम जो पत्नियों को अलग रखते हो वेश्याओं से और प्रेमिकाओं को अलग रखते हो पत्नियों से कितना आतंकित होते हो तुम एक स्त्री से”
लेकिन सुधाकर के लिए तो वैश्या ही उसकी प्रेमिका थी, वह प्रेमिका ही फिर पत्नी बन गई, जब वह पत्नी बनी भी न रह सकी तो एक याद बनकर रह गई। बाराबंकी का खाली कमरा, कमरे के आगे लिखा “मुमताज महल” और धमनी धमनी मन मस्तिष्क में बहते रहने वाली एक याद…।
धन्वा, सुधाकर से यदि एकबार भी मिले होते तो अपने घर जाकर अपनी किताब का वह पन्ना ढूंढते और उसे जरूर फाड़ते जिसमें स्त्री से आतंकित होने की बात उन्होंने लिखी थी। या नीचे किसी एक कोने में लिख देते कि सभी पुरुषों पर ये पंक्ति लागू नहीं होती। या लिखते कि सुधाकर की मृत्यु के बाद ही मेरी किताब की पहली प्रतिलिपि बेची जाए। अन्यथा सुधाकर जैसों के चलते समस्त पुरुषों पर लिखी उनकी कविता झूठी ही पड़ जाती।
सुधाकर जिसे प्रेम मिला भी तो एक स्त्री के कोठे पर! जिनके बिस्तर पर पुरुषों के जाने से न जाने कितनी प्रेम कहानियां खंडित हुई रही होंगी। लेकिन सुधाकर था कि वहां से प्रेम ही ले आया। सब चुपके चुपके “रंडी” कहते, सुधाकर “पत्नी” कहता। नया घर बनाया तो देवी की जगह कथित वैश्या ही पूज दी।
प्रेम कहानियों में यदि सबसे अधिक कुछ व्यर्थ है तो प्रेम की परिभाषाएं हैं। परिभाषा असल में प्रेम की मृत्यु है। प्रेम मुझे लगता है कोई स्थितिजन्य अनुभूति है। जिसकी परिभाषाएं गढ़ने का अधिकार पेशेवर कवि–लेखकों से छीनकर प्रेमी प्रेमिकाओं को ही सौंप देना चाहिए। अदने से प्रेमी–प्रेमिकाएं प्रेम की कोई गैर–साहित्यिक परिभाषा ही कहेंगे, लेकिन उनमें शीशे सी सच्चाई तो होगी।
इसलिए किसी एक से ही प्रेम किए जाने की बात को मैं खारिज करता हूँ। मेरे लिए प्रेम की दुनिया एक गैलेक्सी की दुनिया है जहां हर तारे के रहने की अपनी जगह है। किसी एक तारे के टूटने की जगह कोई दूसरा तारा नहीं ले लेता। ऐसी कोई गैलेक्सी जहां टूटे हुए तारे और नए तारे, दोनों साथ रह सकते हों। यहां सबकी अपनी जगह है। जैसे पहला प्रेम शुरू होता है उस स्त्री से,जिसकी योनि से निकलकर हमने पृथ्वी पर पहली बार आंखें खोलीं थीं। उसके बाद शुरू होता है प्रेम किए जाने का अंतहीन दौर, पहली प्रेमिका से लेकर खुद की आंख मूंद जाने तक का दौर। जिसमें अनगिनत लोग हैं, प्रेमी हैं, प्रेमिकाएं हैं।
इसलिए एक प्रेम, एक प्रेमी, एक प्रेमिका, एक रिश्ता, एक प्रतिबद्धता, सब कितनी रद्दी सी बातें हैं। जब कोई कहता है “मैं किसी और से प्रेम नहीं करता, मैं सिर्फ तुमसे प्रेम।करता हूँ। या कोई ये कहती है कि मैं किसी और को याद नहीं करती, मैं तो सिर्फ तुम्हें याद करती हूं” तो लगता है कि ये सब हर बात में “सिर्फ” कहकर प्रेम को किसी ‘एक’ से ही किए जाने की वस्तु क्यों बना देना चाहते हैं।
यदि उनकी प्रेम की परिभाषाएं ओछी न होतीं तो उन्हें “सिर्फ” लगाने की आवश्यकता न पड़ती। परिभाषा सही होती तो उनके “सिर्फ” में अन्य स्त्री–पुरुषों के नाम भी जुड़ते.. और इसे कहने में उन्हें कोई लज्ज़ा भी न आती। चूंकि प्रेम में “सिर्फ” नहीं होता… हजारों यादें होतीं हैं।
अगली बार कोई कहे कि वह “सिर्फ” तुम्हें प्रेम करता है तो कहना वह झूठ बोल रहा है… वो जो किसी और को याद भी नहीं करता, तुमसे ‘प्रेम’ कैसे कर सकता है?
“प्रेम…. प्रेम मतलब किसी को याद करना”
यह लेख श्याम मीरा सिंह ने लिखा है जिसे हमने उनके फेसबुक प्रोफाइल से साभार प्रकाशित किया है. श्याम एक अच्छे लेख़क हैं और उनका नजरिया किसी भी चीज को देखने का इतना खुबसूरत है की किसी को भी उनके लेखनी से प्यार हो जाए.
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