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🌚 *कलयुग अभी बच्चा नहीं बल्कि बूढ़ा हो गया है….*
🙎🏻♂ *आज का मानव कलियुग और सृष्टि के महाविनाश को लेकर चिंतित है मगर यदि सच्चाई जाने तो दु:खी के बजाय सुखी हो जाये, यह है राजयोग मेडिटेशन का एक गुह्य रहस्य।*
◼️ यह खुशी की बात है सृष्टि का विनाश निकट है और शीघ्र ही सतयुग आने वाला है। आज बहुत से लोग कहते हैं कि “कलियुग अभी बच्चा है, अभी तो इसके लाखों वर्ष और हैं । शास्त्रों के अनुसार अभी तो सृष्टि के महाविनाश में बहुत अधिक समय रह गया है। परन्तु अब परमपिता परमात्मा कहते हैं की अब तो कलियुग बूढ़ा हो चुका है।
◼️ कलयुग अभी बच्चा नहीं बल्कि थोड़ा सा बचा है। अब तो सृष्टि के महाविनाश की घड़ी निकट आ पहुंची है। अब सभी देख भी रहे हैं यह सृष्टि काम, क्रोध, लोभ, मोह तथा अहंकार की चिता पर जल रही है। सृष्टि के महाविनाश के लिए एटम बम, हाइड्रोजन बम तथा मूसल(मिसाइल्स) भी बन चुके हैं। अत: अब भी यदि कोई कहता है कि महाविनाश दूर है, तो वह घोर अज्ञान में है और कुम्भकर्णी निद्रा में सोया हुआ है, वह अपना अकल्याण कर रहा है।
◼️ अब जबकि परमपिता परमात्मा शिव अवतरित होकर ज्ञान अमृत पिला रहे हैं, तो वे लोग उनसे वंचित है।
◼️ आज तो वैज्ञानिक विशेषज्ञ भी कहते हैं कि जनसंख्या जिस तीव्र गति से बढ़ रही है, अन्न की उपज इस अनुपात से नहीं बढ़ रही है इसलिए वे अत्यंत भयंकर अकाल के परिणाम स्वरूप महाविनाश कि घोषणा करते हैं।पुनश्च, वातावरण प्रदूषण तथा पेट्रोल, कोयला इत्यादि शक्ति स्रोतों के कुछ वर्षो में ख़त्म हो जाने कि घोषणा भी वैज्ञानिक कर रहे हैं।
◼️अन्य लोग पृथ्वी के ठण्डे होने के कारण हिमपात कि बात कह रहे हैं। दूसरी ओर अति गर्मी के कारण ग्लेशियर्स पिघल कर समुद्र का वाटर लेवल बड़ा रहे हैं। आज केवल रूस और अमेरिका के पास ही इतने आणविक अस्त्र हैं, उससे अनेक बार इस धरती को खत्म किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, आज का जीवन ऐसा विकारी एवं तनावपूर्ण हो गया है कि अभी लाखों वर्ष तक कलियुग को मानना तो इन सभी बातों की ओर आंखे मूंदना ही है, परन्तु सभी को याद रहे कि परमात्मा अधर्म के महाविनाश से ही देवी देवता धर्म की पुन: स्थापना भी कराते हैं।
◼️ अत: सभी को मालूम होना चाहिए कि अब परमप्रिय परमपिता परमात्मा शिव सतयुगी पावन एवं दैवी सृष्टि कि पुन: स्थापना करा रहे हैं। वे मनुष्य को देवता अथवा पतितों को पावन बना रहे हैं। अब उन द्वारा सहज राजयोग तथा ज्ञान यह अनमोल विद्या सीखकर जीवन को पावन, सतोप्रधान , तथा सुख-शांति संपन्न बनाने का सर्वोत्तम पुरुषार्थ करना चाहिए।
◼️जो लोग यह समझ बैठे हैं,कि अभी तो कलियुग में लाखों वर्ष शेष हैं भौतिक चीज़ों में ही अपना समय व्यतीत कर रहे हैं, वे अपने ही सौभाग्य को लौटा रहे हैं।
◼️ अब कलियुगी सृष्टि अंतिम सांस ले रही है, यह मृत्यु-शैय्या पर है। यह काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार रोगों द्वारा पीड़ित है अत: इस सृष्टि की आयु अरबो वर्ष मानना एक महान भूल है और कलियुग को बच्चा मानकर अज्ञान-निंद्रा में सोने वाले लोग ” *कुम्भकरण*” है। कुम्भकरण कोई सत्य में किरदार नहीं था मगर एक प्रतीक है जो मनुष्य इस ईश्वरीय सन्देश को एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल देते हैं, उन्हीं के कान ऐसे कुम्भ के समान है, और वे कुम्भकरण की नींद सो रहे हैं क्योंकि कुम्भ बुद्धिहीन होता है।
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