विश्वास एक ऐसा शब्द है जिसे सुनकर हम थोडा सा अपने को मजबूत समझने लगते हैं । यह शब्द अपने आप मे पूर्ण है ; विश्वास करना मतलब जो नहीं है उसे देखना , और यकीन करना ? यह ऐसा है , जैसे कोई आकर हमें कहे कि चलो मैं तुम्हें बहुत सा धन दूँगा ; और हम उस बात को मानकर उस व्यक्ति के पीछे हो लें । चाहे हम उस व्यक्ति को जानते हों या न जानते हो , पर उस व्यक्ति के पीछे हो लेते हैं ।

क्योंकि विश्वास आशा की हुई वस्तुओं का निश्चय और अनदेखी वस्तुओं का प्रमाण है । परमेश्वर को कभी किसी ने नहीं देखा , पर हम मानते हैं वो है । और अपने खोजनेवाले को प्रतिफल देता है ।
यह संसार जिसमें हम रहते हैं ; खाते पीते , सोते जागते चलते सारे काम करते हैं ; इस संसार की रचना हमारे परमेश्वर यहोवा के द्बारा की गई यह हमें बाइबिल से ही पता चलता है ,क्योंकि बाइबिल ही परमेश्वर के होने का प्रमाण प्रस्तुत करती है । जो लोग बाइबिल पर विश्वास नहीं करते , वो एक ऐसे अनजाने रास्ते पर चल रहे हैं जिसका कोई अन्त नहीं , पर जब हम बाइबिल पर विश्वास करते हुए चलते हैं तो हमें पता चलता है कि हमारी मन्जिल यीशु मसीह के साथ ही है । 
पूरी बाइबिल ही विश्वास पर आधारित है , अब्राहम विश्वास ही के द्बारा चल पडा नहीं जानता था कहाँ जाना है । परमेश्वर ने उसका साथ दिया वह निकल पडा ।
 परमेश्वर की आवाज सुनकर नूँह जहाज बना रहा था , लोग उसे पागल समझते थे पर वो जल प्रलय से अपने व अपने परिवार को उसी जहाज के द्बारा बचा पाया । जब हम प्रार्थना करते तो हम विश्वास करते हैं कि हमारा परमेश्वर हमारे साथ है जो प्रार्थना को सुन कर कबूल करता है अगर आप विश्वास की कमी को महसूस करते हैं तो परमेश्वर से प्रार्थना करें जिस प्रकार चेलों ने यीश से कहा हमारा विश्वास बडा उसी प्रकार आप को भी बोलना पडेगा यीशु हमारा विश्वास बडा वो जरूर मदद करेगा क्योंकि वो हमारा जीवित परमेश्वर है ।
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर
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