मन बेलगाम घोड़े की तरह है|मन  को नियंत्रित करना , जंग जीतने के बराबर है| जब सब ठीक होता है , मन प्रसन्न रहता है| जब कोई चिंता और परेशानी ना हो , उस समय इबादत करना आसान होता है| वक़्त अच्छा हो, तो सब अच्छा लगता है| अच्छा समय पंख लगा कर उड़ जाता है| बुरा समय , कछुए की चाल से चलता है| जब आप समस्याओं के दलदल में धंसते चले जाते हैं , और कोई सहारा नहीं मिलता ; तो मन का विचलित होना स्वाभाविक है|  हकीक़त की सख्त ज़मीन पर , ख्व़ाब शीशे की तरह टूट कर बिख़र जाते हैं|जब उम्मीद की शम्मा बुझने लगती है , तब दिल ओ दिमाग़ में अंधेरा सा छ जाता है| जीने के लिए उम्मीदों का होना, निहायत ज़रूरी है| निराश और हताश शख्स , हारे हुए सिपाही की तरह होता है| समस्याएं कैसी भी क्यों ना हों , मन का स्थिर रहना ज़रूरी है| आप चाहे भीड़ से घिरे हों , या तनहा हों , बेचैन मन भटकता फ़िरता है| इंसान सोचते सोचते डूबता जाता है , जैसे दिमाग़ के तह में कोई दरिया हो| अनचाहे ख़्यालों के शोर से , नींद परिंदों की तरह उस जाती है| दाऊद भजन 57:7 में कहता है —हे परमेश्वर मेरा मन स्थिर है , मैं गाऊंगा , वरन भजन कीर्तन भी करूंगा| धन्यवाद और स्तुति , मन को शांत रखने का सबसे अच्छा तरीका हैं| मन जब भी बेचैन हो , स्तुति कीजिये| चलते फ़िरते ख़ुदा का शुक्र करते रहिये| इससे बेहतर कोई और इलाज़ नहीं हो सकता|
आमीन
प्रभु के पास ही हमारी सच्ची शांति है
रैव्ह राजेश गिरधर
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