मनुष्य जब इस जीवन रुपी संसार में चलता है तब वो अपनी आँखों को हमेशा ऊपर कि ओर ही रखता है । उसे अपनी मन्जिल पर पहुँचने की जल्दी जो होती है वो मन्जिल जिसे वो अपने सामने देखता है पर वो होती उस से बहुत दूर है । इसी भागमभाग में वो बहुत बार गलत फैंसले लेता है जो उसके लिए ठोकर का कारण बन जाती हैं और बहुत बार इस भागदोड में दूसरे भी उसे ठोकर खिलाने कि फिराक में रहते हैं जो जीवन को बहुत पीछे धकेलने के लिये काफी होता है ।
जब भी किसी मनुष्य का विनाश होता है तो वह उसके खुद के कारण ही होता है वजह गर्व से फूल कर गलत फैंसले लेने के कारण। संसार में बहुत ही भ्रम है बहुत से भेद हैं, जो मनुष्यों के सामने खोले नही गये पर मनुष्य उन भेदों को जानने की चाहत में लगा रहता है इस दौरान वो संसार के स्वामी को भूलकर आगे निकलने की चाह में घमन्ड मे आकर गर्व से ऐसे काम कर बैठता है जिनका करना उसके बस में नहीं पर फिर भी वो करता है । जिस कारण उसे नींचा देखना पडता है अब हमें करना क्या है जो हमें ठोकर न लगे ? सीधी सी बात, कभी भी जल्दबाजी में कोई ऐसा काम न करें, न किसी का अपमान करें, किसी की गरीबी का मजाक न उडाएँ ,और किसी को भी बैवकूफ न समझे,किसी को छोटा या तुच्छ न समझें दूसरे की भी सुने,धीरज धरके सब काम करे, परमेश्वर को सामने अपने आप को दीन करें ताकि,आप और हम ठोकर खाने से बच जाएँ ? यीशु मसीह कहते हैं ठौकरों का लगना तो तय है पर हाय उस पर जिसके कारण ठोकर लगती है शान्त रहें न किसी के ठोकर का कारण बनें और न ही स्वयं अहंकारी होकर ठोकर खाएँ ।
आमीन
प्रभु आप सबको हिम्मत दें
आपकी सेवा में प्रभु का दास
रैव्ह राजेश गिरधर

