बाहर से आ रही आवाजों को, इंसान नज़रअंदाज़ कर सकता है, मगर अपने दिल की आवाज़ को नहीं| भजन 84:2 में लिखा है-मेरा प्राण , परमेश्वर के आंगनों की अभिलाषा करते-करते , मूर्छित हो चला ; मेरा तन और मन , दोनों जीवते ईश्वर को पुकार रहे हैं| यीशु जीवन का जल है , मगर उनके लिए जो प्यासे हैं| यीशु जीवन की रोटी है , मगर उन के लिए , जो भूखे हैं| ये माना की यीशु , द्वार पर खड़ा खटखटा रहा है ; मगर दरवाज़ा तब ही खुलेगा , जब दिल से एक आवाज़ उभरेगी , दरवाज़ा खोल दें|
चर्च और कलीसिया से कोई किसी को नहीं जोड़ सकता| जोड़ सकती हैं , तो दिल की आवाज़| जब अंतर्मन में , यीशु से मिलने की छटपटाहट हो , तब व्यक्ति किसी के रोके नहीं रुकता| मौसम , घर का काम , व्यस्तता , बीमारी , ये सब बहाने बाज़ी है| जब ख़ुदा से दिल लग जाता है , तब कोई ताक़त आपको चर्च जाने से रोक नहीं सकती
आमीन
प्रभु जिस द्वार को खोलते हैं उसे कोई बन्द नही कर सकता
रैव्ह. राजेश गिरधर

