बाईबल बताती है कि पिता परमेश्वर जिससे वो प्रेम करता है उसकी वो ताडना भी करता है, जब हम उस से प्रेम लेना जानते हैं तो क्या उसकी ताडना को तुच्छ जाने ? 
वो हमारी ताडना इसलिये करता है ताकि हम जिस गलत रास्ते को अपनाने जा रहे होते हैं जिसका अन्त भयानक होता है तब वो हमें उस रास्ते पर चलने से रोकता है कभी वचन के द्धारा , कभी पासबानों के द्धारा , कभी सपनों में बाते करने के द्धारा ; वो हमें रोकता है अगर हम समझदार हैं तो उसकी बातों को और संकेतों को समझ लेते हैं नासमझ हैं तो नहीं समझ पाते और मूर्ख हैं तो उस बात को मजाक में ले लेते हैं जो नासमझी हमसे हो जाती है उस को वो हमारे पास से दूर करने के लिये हमें ताडना के रुप में दुखों से गुजारता है और वो चाहता है हम बच जाएँ हम उसके हाथों की बनाई हुई रचना है और अपनी रचना को कोई भी बिगडते हुए नहीं देख सकता फिर वो तो हमारा पिता है । हमें कैसे खराब होने देगा पर जब भी वो हमें दुख देकर वापस लाता है तब हम अपने पापों को अंगिकार करके यीशु के लहू से शुद्ब हो चुके होते हैं और वो सुखद अहसास बहुत ही सुहावना होता है ।
यही कारण है दुख के बाद आनेवाले सुख का आनन्द बहुत ही सुखदायक होता है इसलिये परमेश्वर के द्धारा दिये गये सुख में मगन रहो और दुख में भी मगन होकर प्रार्थना में लगे रहो ।
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर
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