विश्वास की डोर के दो सिरे होते हैं , एक सिरे पर आप , और दूसरे सिरे पर है आपका ख़ुदा| इस डोर का मज़बूत होना बहुत ज़रूरी है| शैतान के निशाने पर आप से भी कहीं ज्यादा , आपका विश्वास है| इस डोर के टूटते ही आप , शैतान का शिकार बड़ी आसानी से बन जाते हैं| जो इस डोर से बंधा है , उसको मुसीबतों के पहाड़ भी गिरा नहीं सकते| पतरस ने जब पानी पर पर पहला कदम रखा , तो उस समय नज़र ना आने वाली डोर , उसके और येशू बीच बंधी थी| काश पतरस उस डोर को देख पाता और थामे रहता, उस आंधी की औकात क्या जो उसे डुबा सकती| भजन संहिता:-33=20 में लिखा है — हम यहोवा का आसरा देखते आए हैं , वो हमारा सहायक और हमारी ढाल है| ख़ुदा से आस लगाए रहने का मतलब है , आप विश्वास की डोर को थामे हैं| मुश्किलों के पहाड़ , राई के दाने के बराबर विश्वास के आगे कुछ नहीं हैं| विश्वास है तो समुंदर भी दो भाग हो जायेगा ; विश्वास है , तो यरीहो की दीवार भी गिर जाएगी| हर मुश्किल आसान हो जाएगी।
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर

