परमेश्वर हमें कब ग्रहण करता है,जब हम सब 2 कुरिन्थियों 6:17-18 के अनुसार:-इसलिये प्रभु कहता है, कि उन के बीच में से निकलो और अलग रहो; और अशुद्ध वस्तु को मत छूओ, तो मैं तुम्हें ग्रहण करूंगा।
और तुम्हारा पिता हूंगा, और तुम मेरे बेटे और बेटियां होगे: यह सर्वशक्तिमान प्रभु परमेश्वर का वचन है॥
परमेश्वर अपने लोगों से बुराई से दूर रहने को कहता है। बुराई से दूर रहने का विचार परमेश्वर का अपनी प्रजा से सम्बन्ध का मूल सिद्धांत हैं।
हम सभी को चाहिए कि खुद को पाप से और उन सभी बातों से अलग रखना जो यीशु मसीह, व परमेश्वर के वचन के विरुद्ध हैं।
हमारा समर्पण, आराधना और सेवा के द्वारा हम परमेश्वर के ओर अधिक निकट आ सकते हैं।
वचन बताता हैं कि यह एक ऐसा सम्बन्ध हैं, जिसमे परमेश्वर हमारा स्वर्गीय पिता होता है जो हमारे साथ रहता हैं और हम उसके बेटे और बेटियाँ होते हैं।
2 कुरुन्थियो 6:16-18 के अनुसार :- परमेश्वर की निज प्रजा बने रहने के लिए जरूरी है सभी लोगों से भिन्न दिखे, पवित्र और अलग रहे। लोगो से अलग रहना मतलब परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार चलना। तभी परमेश्वर हमे ग्रहण करेगा। जैसे जैसे हम प्रभु की आज्ञाओ में बढ़ते जाते हैं वैसे वैसे हम खुद ही सांसारिक लोगो से अलग लगने लगते हैं , इसके लिए कुछ मेहनत करने की जरूरत नही होती हैं। जब हम संसार से अलग होकर परमेश्वर के निकट बने रहते हैं। तो परमेश्वर पिता की तरह देख भाल करता है।
आमीन
परमेश्वर आप सभी को आशीष करें।
रैव्ह राजेश गिरधर
